
भारत-कनाडा टेंशन: किन मौकों पर भारत ने पश्चिमी मुल्कों के डिप्लोमेट्स को दिखाया बाहर का रास्ता, क्या हुआ अंजाम?
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कनाडाई पीएम जस्टिन ट्रूडो ने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत का हाथ बता दिया. इसके बाद से दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ा हुआ है. दोनों ने ही एक-दूसरे के टॉप डिप्लोमेट्स को निष्कासित कर दिया. वैसे ये पहला मौका नहीं, जब भारत ने पलटवार करते हुए किसी पश्चिमी देश के डिप्लोमेट को हटाया है.
कनाडाई पीएम जस्टिन ट्रूडो ने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत का हाथ बता दिया. इसके बाद से दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ा हुआ है. दोनों देशों ने ही एक-दूसरे के टॉप डिप्लोमेट्स को निष्कासित कर दिया. वैसे ये पहला मौका नहीं, जब भारत ने पलटवार करते हुए किसी पश्चिमी देश के डिप्लोमेट को हटाया है.
सबसे पहले ये समझते चलें कि डिप्लोमेट क्या करते हैं. ये इंडियन फॉरेन सर्विस के लोग होते हैं, जो विदेश नीति पर काम करते हैं. डिप्लोमेट दूसरे देशों में अपने देश की सरकार का चेहरा होते हैं, जिनका काम इंटरनेशनल रिश्तों में मजबूती लाना होता है.
संरक्षण मिला होता है राजनयिकों को
विदेशों में रहते डिप्लोमेट्स के पास कई सारी सुविधाएं होती हैं, जिसे डिप्लोमेटिक इम्युनिटी कहते हैं. इसके तहत उसकी सुरक्षा जांच न होने से लेकर कई सुविधाएं मिलती हैं. यहां तक कि देश में अगर किसी वजह से टेंशन बढ़ जाए तो इम्युनिटी के तहत डिप्लोमेट को सुरक्षित उसके देश लौटाया जाता है.
बाहर भी किया जा सकता है
जिस तरह हिंदू माइथोलॉजी में दूत की रक्षा का जिक्र मिलता है, मॉर्डन डिप्लोमेट कुछ वैसे ही हैं. लेकिन कई हालातों में देश को फॉरेन डिप्लोमेट्स को बाहर का रास्ता भी दिखाना होता है. विएना कन्वेंशन ऑन डिप्लोमेटिक रिलेशन्स में इसका साफ जिक्र है. इसके आर्टिकल 9 में लिखा है कि मेजबान मुल्क कभी भी उसे पर्सोना नॉन ग्रेटा डिक्लेयर कर सकता है, यानी जिसका होना उसे स्वीकार नहीं.

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