
भांग, धतूरा, मदार, बेलपत्र और दूध... शिवजी के चढ़ावे में क्यों हैं शामिल
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महाशिवरात्रि का त्योहार शिवजी के विषपान की कथा और प्रकृति पूजा के महत्व को दर्शाता है। शिवजी ने समुद्र मंथन के दौरान निकले जहरीले विष को पीकर सृष्टि के संरक्षण का कार्य किया। इस दिन दूध, बेलपत्र, धतूरा, मदार और भांग जैसी वस्तुएं शिवजी को चढ़ाई जाती हैं, मगर क्यों?
शिव मंगल के प्रतीक हैं. संस्कृति हैं, शाश्वत हैं, सनातन हैं. शिव साकार और निराकार भी हैं. इसीलिए शिव ही सृष्टि के मूल और आधार हैं. उनके रूप और शृंगार में ये स्पष्ट भी होता है. सागर मंथन में निकले 14 रत्नों में से सबसे पहले जहर निकला. ये जहर कोई नहीं पीना चाहता था. इसलिए शिवजी ने आगे बढ़कर इस जहर को पी लिया. इस जहर को पीने के कारण ही शिव को विष बसन और विषभोजी नाम मिला. यानी वह व्यक्ति जो जहर ही पहनता-खाता हो.
महाशिवरात्रि का यह उत्सव प्रकृति पूजा का भी है. शिव पूजा बताती है कि जीवन में जो भी है सब कुछ प्रकृति है और कोई भी वस्तु ऐसी नही है जो बेकार हो. सभी का अपना अर्थ और महत्व है. महादेव को वह सभी तत्व, फल-फूल बहुत अच्छे लगते हैं, जिन्हें रोज की जिंदगी में एक आम व्यक्ति त्याग देता है. असल में वह सभी वस्तुएं औषधियां हैं, जिन्हें महादेव ही धारण कर सकते हैं. इसलिए उन्हें कच्चा दूध, बेलपत्र, धतूरा, मदार, भांग चढ़ाई जाती है.
दूधः महादेव को गाय का शुद्ध कच्चा दूध बहुत प्रिय है. इसलिए जिन पंच तत्वों से रुद्राभिषेक बताया गया है. उनमें सबसे प्रमुख दूध शामिल है. दूध एक सम्पूर्ण आहार है. इसमें सभी प्रकार का पोषण है. इसके पोषक तत्व किसी से छिपे नहीं हैं इसलिए यह जीवन का आधार भी है.
बेल के पत्तेः समुद्र मंथन के समय जब महादेव ने विष पान किया तो उसके प्रभाव से उनका शरीर जलने लगा. इसका असर कम करने के लिए बेल के पत्तों का रस महादेव को दिया गया और इसकी छाल घिस कर इसका लेप किया गया. बेल की छाल, चंदन की तरह ही शीतलता देती है. इसलिए यह महादेव को प्रिय है.
धतूराः कांटेदार फल धतूरा आम तौर पर जहरीला और जंगली माना जाता है. लेकिन यह भी तर्क है कि जहर ही जहर को काटता है. इसका भी इतिहास विषपान की घटना से जुड़ा है. धतूरा अपने अंदर कई अमृत रूपी गुणों को समेटे हुए है. आयुर्वेद में यह पुराने बुखार, जोड़ों के दर्द, विष प्रभाव आदि के कष्ट को हरने वाला कारक बताया गया है.
मदार: महादेव को जो फूल बहुत प्रिय है वह है मदार का फूल. सफेद मदार के फूल तो सबसे अधिक प्रिय हैं. यह भी सिर्फ एक फूल नहीं बल्कि दवा ही है. इसके अलावा यह आयुर्वेद में जलोदर, पीलिया, हैजा, कालरा और अन्य पेट रोगों के उपचार में काम आने वाला है. इसके अनेक औषधीय गुण इसे अमृत जैसा बनाते हैं.

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