
भगवान बुद्ध को खुश करने के लिए चढ़ाई अपनी ही बलि, बौद्ध भिक्षु ने सिर किया धड़ से अलग
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थाइलैंड में एक बौद्ध भिक्षु ने भगवान बुद्ध की शरण में अपने आपको न्योछावर कर दिया. उन्होंने अपने खुद के सिर को एक यंत्र से इस उम्मीद में काट दिया ताकि उनका अगला जन्म बेहतर हो और वे अपने नए जीवन में आध्यात्म के नए स्तर को छू सकें और निर्वाण को प्राप्त कर सकें.
थाइलैंड में एक बौद्ध भिक्षु ने भगवान बुद्ध की शरण में अपने आपको न्योछावर कर दिया. उन्होंने अपने खुद के सिर को एक यंत्र से इस उम्मीद में काट दिया ताकि उनका अगला जन्म बेहतर हो और वे अपने नए जीवन में आध्यात्म के नए स्तर को छू सकें और निर्वाण को प्राप्त कर सकें. (प्रतीकात्मक तस्वीर/ Getty Images) 68 साल के थम्माकोर्न वांगप्रीचा के बारे में कहा जा रहा है कि वे पिछले पांच सालों से इस प्रक्रिया की तैयारी कर रहे थे. वांगप्रीचा का मानना था कि अपने देवता के लिए अपने आपको त्यागने से उनकी मेरिट अच्छी होगी और उन्हें अगला जीवन और भी बेहतर साबित होगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर/ Getty Images) बता दें कि बौद्ध धर्म में मेरिट का कॉन्सेप्ट बेहद प्रचलित है. मेरिट एक ऐसी ऊर्जा को कहा जा सकता है जो अच्छे कर्म करने से आती है. इसके चलते किसी इंसान की परिस्थितियां भी सकारात्मक होती चली जाती हैं और बौद्ध धर्म के अनुसार, इससे आने वाला जन्म भी प्रभावित होता है. मेरिट को मोक्ष की राह से भी जोड़ कर देखा जाता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर/ Getty Images)
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