
बेटे को हुआ ट्यूमर, टूट गए थे जॉनी लीवर, चर्च के पादरी ने दिखाई राह
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एक वक्त पर कॉमेडियन जॉनी लीवर के परिवार के लिए एक भयानक व्यक्तिगत संकट आया था, जिसने सब कुछ बदल दिया. यह मोड़ तब आया जब जॉनी लीवर के बेटे जेसी लीवर को कम उम्र में ही गर्दन में ट्यूमर का पता चला. इस डायग्नोसिस ने पूरे परिवार को हिला दिया था.
भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित कॉमिक एक्टर्स में से एक सीनियर एक्टर जॉनी लीवर अपनी पर्सनल लाइफ को लाइमलाइट से दूर रखना पसंद करते हैं. 1990 के दशक में ऐसा समय था जब वे लगभग हर रिलीज होने वाली फिल्म में नजर आते थे. अपार प्रसिद्धि, सफलता और आर्थिक स्थिरता के साथ उनका जीवन चरम पर था. हालांकि जल्द ही जॉनी के परिवार के लिए एक भयानक व्यक्तिगत संकट आया, जिसने सब कुछ बदल दिया.
यह मोड़ तब आया जब जॉनी लीवर के बेटे जेसी लीवर को कम उम्र में ही गर्दन में ट्यूमर का पता चला. इस डायग्नोसिस ने पूरे परिवार को हिला दिया. भारत में की गई शुरुआती सर्जरी असफल रही, जिससे परिवार बेहद परेशान और भविष्य को लेकर अनिश्चित हो गया. लेकिन उसके बाद जो हुआ, उसे परिवार अब चमत्कार के अलावा कुछ नहीं मानता.
बदल गया लीवर परिवार का जीवन
जेसी लीवर उस समय करीब 10 या 12 साल के थे जब उन्हें ट्यूमर का पता चला. विकी ललवानी के यूट्यूब चैनल पर इस कठिन दौर को याद करते हुए उनकी बड़ी बहन और जॉनी की बेटी जेमी लीवर ने बात की. उन्होंने कहा, 'उसे स्कूल के दिनों में ट्यूमर हुआ था. पहले हमें समझ नहीं आया कि क्या है, लेकिन फिर यह अनियंत्रित हो गया. यह उसे असहज करने लगा. उसने ट्यूमर छिपाने के लिए कपड़े बदलने शुरू कर दिए. बहन के रूप में मुझे लगा कि मुझे उसे बचाना है. हम एक ही स्कूल में थे और मैं हमेशा उसके बारे में बहुत सुरक्षात्मक रहती थी.'
जेमी ने बताया कि परिवार को जटिल सर्जरी के लिए तैयार होना पड़ा. उन्होंने कहा, 'हमें सर्जरी करानी पड़ी, जो बहुत कठिन और जटिल थी. उस दौर में हमारा जीवन पूरी तरह बदल गया. हम हमेशा से ईश्वर से डरने वाला परिवार थे. लेकिन इस घटना के बाद चीजें हमारे लिए बहुत आध्यात्मिक और वास्तविक हो गईं.' उन्होंने कहा कि इस अनुभव ने परिवार को यह सिखाया कि जीवन में क्या वास्तव में मायने रखता है.
जेमी ने कहा, 'यह अचानक हमें सिखा गया कि पैसा और प्रसिद्धि फीकी पड़ जाएंगी. जो वास्तव में मायने रखता है, वह है परिवार, विश्वास और एक-दूसरे के लिए होना. उस समय हम परिवार के रूप में एकजुट हुए, बहुत प्रार्थना की और अपनी जिंदगी पूरी तरह ईश्वर के हवाले कर दी.'

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