
बीजेपी से टिकट नहीं मिला तो क्या निर्दलीय उतरेंगे वरुण गांधी? पीलीभीत में खरीदवाए 4 सेट नॉमिनेशन पेपर
AajTak
क्या वरुण गांधी निर्दलीय चुनाव लड़ने जा रहे हैं, क्या BJP इस बार उन्हें पीलीभीत से टिकट नहीं देगी? यह सवाल इसलिए उठ रहे हैं, क्योंकि वरुण ने अपने प्रतिनिधि को भेजकर पीलीभीत से सांसद के 4 नामांकन फार्म खरीदे हैं.
अगर भारतीय जनता पार्टी वरुण गांधी को पीलीभीत से लोकसभा का टिकट नहीं देती है तो क्या वह निर्दलीय ही मैदान में उतर जाएंगे. यह सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि वरुण गांधी के प्रतिनिधि ने पीलीभीत से सांसद के नामांकन का पर्चा खरीदा है. बताया जा रहा है कि वरुण गांधी के प्रतिनिधि दिल्ली से आए थे. उन्होंने 4 सेट नॉमिनेशन पेपर खरीदा और वापस दिल्ली चले गए.
सूत्रों के मुताबिक बीजेपी से टिकट ना मिलने की सूरत में वरुण गांधी निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर भी पर्चा दाखिल करने की तैयारी में हैं. अगर बीजेपी ने पीलीभीत से वरुण गांधी को टिकट नहीं दिया तो पूरी संभावना है कि वरुण गांधी निर्दलीय के तौर पर नामांकन दाखिल कर देंगे.
वरुण को टिकट दिए जाने का हो रहा विरोध!
हालांकि, सीटों पर नाम को लेकर अभी प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में CEC की बैठक होनी बाकी है. इस बैठक में तय होगा कि वरुण को टिकट मिलेगा या नहीं. सूत्रों के मुताबिक प्रदेश स्तर के सभी भाजपा नेताओं ने कोर कमेटी की बैठक में वरुण गांधी को टिकट दिए जाने का विरोध किया है.
राज्य सरकार के खिलाफ खोल रखा है मोर्चा
बता दें कि यूपी की पीलीभीत सीट के लिए पहले चरण में वोटिंग होनी है. इसके लिए आज से नॉमिनेशन शुरू हो चुके हैं. लेकिन अब तक बीजेपी और सपा ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं. इस सीट से वरुण गांधी सांसद हैं. पिछले कुछ साल से वो राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं. वरुण की नाराजगी सार्वजनिक है.

देश के 3 शहरों से ऐसी खबरें आईं जिसने दिल दहला दिया. आग लगने के कारण दिल्ली, चंडीगढ़ और इंदौर में भयानक हादसे हुए. भीषण आग की चपेट में पूरा का पूरा परिवार आ गया. दिल्ली में 9 लोगों की मौत हुई तो इंदौर में भी 8 लोगों को जान गंवानी पड़ी. चंडीगढ़ में लगी आग भयावह जरूर है, लेकिन गनीमत रही कि किसी तरह की जनहानि नहीं हुई.

अमेरिका-इजरायल की ईरान से जंग की वजह से देशभर में LPG की किल्लत अब भी जारी है. गैस एजेंसियों के बाहर लम्बी लाइनें हैं. गैस सिलेंडर की कालाबाजारी और जमाखोरी भी हो रही है. होटल-रेस्टोरेंट में गैस का स्टॉक खत्म होने से बिजनेस ठप होने लगे हैं. कई जगह ताले भी लटकने लगे हैं. त्योहारी सीजन में घरों में भी इसका असर दिख रहा है.

पश्चिम बंगाल की सत्ता की कुर्सी का रास्ता अल्पसंख्यकों मोहल्लों से होकर गुजरता है. और ममता बनर्जी ने इस बात को न सिर्फ समझा है, बल्कि पिछले 15 सालों में इसी से अपनी सत्ता के किले को चुनाव दर चुनाव मजबूत बनाया है. आज जब 2026 के विधानसभा चुनाव करीब हैं, तो ममता का मुस्लिम वोट बैंक पर कब्जा पहले से कहीं ज्यादा मजबूत नजर आता है.

कश्मीर से लेकर हिमाचल तक मौसम ने अचानक करवट ले ली है. जोजिला पास और गंदरबल इलाके में ताजा बर्फबारी से ट्रैफिक प्रभावित हुआ है, जबकि गुलमर्ग,सोनमर्ग और अन्य ऊंचाई वाले इलाकों में भारी हिमपात से ठंड फिर लौट आई है. उधर हिमाचल में लाहौल स्पीति, रोहतांग और अटल टनल के आसपास बर्फबारी ने हालात बदल दिए हैं. देखें रिपोर्ट.









