
बिहार में कोरोना बेकाबू पर नीतीश सरकार कर रही सर्वदलीय बैठक का इंतजार
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पटना के सभी अस्पतालों के बेड कोविड मरीजों भर चुके हैं. हर अस्पताल में नोटिस लगा दिया गया है कि बेड फुल हैं. पटना में कोविड के मरीजों के लिए सभी सरकारी अस्पालों को मिलाकर 450 बेड और गैर सरकारी यानी निजी अस्पतालों में करीब 700 बेड हैं.
बिहार सरकार कोरोना को लेकर इस बार कोई रिस्क नहीं लेना चाहती है. यही वजह है कि सरकार 17 अप्रैल को होने वाली सर्वदलीय बैठक का इंतजार कर रही है लेकिन इस बीच कोरोना संक्रमण का आकंड़ा तेजी से बढ़ रहा है. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि होली के दिन यानी 29 मार्च को राज्य में एक्टिव मरीजों की संख्या दो हजार थी. अब उसमें 10 गुना से भी ज्यादा बढ़ोतरी हो चुकी हैं. आसार हैं कि सर्वदलीय बैठक के बाद बिहार में भी लॉकडाउन जैसे कठिन फैसले लिए जाएं लेकिन तब तक हालात कहीं और ज्यादा ना बिगड़ जाएं. कोरोना के बढ़ते आंकड़े को देखते हुए राज्य सरकार ने अप्रैल के पहले सप्ताह में केवल स्कूल कॉलेज और कोचिंग संस्थान 11 अप्रैल तक बंद करने का ऐलान किया लेकिन हालत बिगड़ते चले गए. जिसके बाद मुंबई और महाराष्ट्र के अलावा केरल और पंजाब से आने वाले लोगों की जांच का फैसला लिया गया है. 10 अप्रैल को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्कूल, कॉलेज और कोचिंग संस्थानों को 18 अप्रैल तक बंद करने को कहा था. साथ ही सभी धार्मिक संस्थाओं पर आमजनों की आवाजाही पर 30 अप्रैल तक रोक लगा दी थी. साथ ही बाजार को शाम 7 बजे के बाद बंद करने का निर्देश दिया था. दफ्तारों में 33 प्रतिशत कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने का आदेश भी दिया गया था लेकिन उसके बाद से सरकार की तरफ से कोई कदम नहीं उठाया गया है. हालात ये है कि इस बार के कोरोना विस्फोट ने पिछले साल के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है.
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