
बिहार की हार पर कांग्रेस की बैठक में हंगामा... आपस में भिड़े दो प्रत्याशी, गोली मारने तक की धमकी दी!
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मीटिंग में राहुल गांधी के पहुंचने से पहले ही हंगामा हो गया. बिहार के वैशाली से कांग्रेस प्रत्याशी रहे इंजीनियर संजीव और पूर्णिया से चुनाव लड़ने वाले जितेंद्र यादव के बीच तीखी नोकझोंक इस कदर बढ़ गई कि माहौल तनावपूर्ण हो गया.
बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद दिल्ली में कांग्रेस की ओर से बुलाई गई समीक्षा बैठक गुरुवार को भारी हंगामे का अखाड़ा बन गई. सूत्रों के मुताबिक, बैठक की शुरुआत राहुल गांधी के पहुंचने से पहले ही विवादों से हो गई. बिहार के वैशाली से कांग्रेस प्रत्याशी रहे इंजीनियर संजीव और पूर्णिया से चुनाव लड़ने वाले जितेंद्र यादव के बीच तीखी नोकझोंक इस कदर बढ़ गई कि माहौल तनावपूर्ण हो गया.
जानकारी के अनुसार, इंजीनियर संजीव ने आरोप लगाया कि हाल ही में पार्टी में शामिल हुए 18 नए चेहरों की वजह से कांग्रेस को भारी नुकसान हुआ और अनुभवहीन लोगों पर टिकट का दांव लगाना पार्टी के लिए घातक साबित हुआ. उन्होंने कहा कि संगठन की जमीनी हकीकत को नजरअंदाज कर नए लोगों को उम्मीदवार बनाने के चलते कांग्रेस की कई सीटों पर लड़ाई कमजोर हुई.
इस पर पूर्णिया के उम्मीदवार जितेंद्र यादव ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हम भी नए हैं. जो आज पुराने नेता हैं, वे भी एक समय पर नए ही थे. नए लोगों को हार का कारण बताना गलत है. इसी बात को लेकर दोनों नेताओं के बीच बहस बढ़ गई और देखते ही देखते मामला गर्मागरम विवाद में बदल गया.
बैठक में मौजूद सूत्रों ने दावा किया कि बहस इतनी बढ़ गई कि इंजीनियर संजीव की ओर से जितेंद्र यादव को कथित तौर पर गोली मारने जैसी धमकी देने की बात तक सामने आई. हालांकि बाद में इंजीनियर संजीव ने सफाई दी कि बातचीत को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है और उनकी किसी बात का गलत अर्थ निकाला गया. उन्होंने कहा कि उनका इरादा किसी को डराने या धमकाने का नहीं था.
कांग्रेस की ओर से फिलहाल इस विवाद पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन बैठक में पैदा हुआ तनाव पार्टी की अंदरूनी खींचतान और आपसी अविश्वास को उजागर करता है. पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि हार के असली कारणों पर चर्चा करने के बजाय आपसी आरोप-प्रत्यारोप से संगठन कमजोर होता दिख रहा है.
गौरतलब है कि बिहार में इस बार बीजेपी-जेडीयू गठबंधन ने 202 सीटें जीतकर एक बार फिर सत्ता बरकरार रखी, जबकि आरजेडी-कांग्रेस वाले गठबंधन को केवल 35 सीटों पर संतोष करना पड़ा. कांग्रेस को 2020 के चुनाव में जहां 19 सीटें मिली थीं, इस बार पार्टी मात्र 6 सीटों पर सिमट गई.

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