
बिहार: आनंद मोहन सिंह की रिहाई पर दिवंगत डीएम की पत्नी ने कहा- ग़लत मिसाल बना रहे हैं नीतीश कुमार
The Wire
बिहार जेल नियमों में संशोधन के बाद रिहा होने वाले क़ैदियों में पूर्व सांसद आनंद मोहन सिंह भी हैं, जिन्हें साल 1994 में गोपालगंज के तत्कालीन ज़िलाधिकारी जी. कृष्णैया की हत्या करने का दोषी ठहराया गया था. कृष्णैया की पत्नी के साथ आईएएस एसोसिएशन ने भी सरकार के इस फैसले को लेकर सवाल उठाए हैं.
नई दिल्ली: एक आईएएस अधिकारी और गोपालगंज के ज़िलाधिकारी जी. कृष्णैया की हत्या के दोषी ठहराए गए पूर्व सांसद आनंद मोहन सिंह की नए जेल नियमों के तहत रिहाई को लेकर राजनीतिक दलों, आईएएस एसोसिएशन से लेकर उनके परिवार ने भी रोष जताया है. A convict of a charge of murder of a public servant on duty, cannot be re-classified to a less heinous category. Amendment of an existing classification which leads to the release of the convicted killer of a public servant on duty is tantamount to denial of justice.
इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए जी. कृष्णैया की पत्नी उमा जी. कृष्णैया ने कहा कि नीतीश कुमार हत्या के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्ति को रिहा करके गलत मिसाल कायम कर रहे हैं. इससे अपराधियों को सरकारी कर्मचारियों पर हमला करने का बल मिलेगा क्योंकि उन्हें मालूम है कि वे आसानी से जेल से बाहर आ जाएंगे. — IAS Association (@IASassociation) April 25, 2023
उन्होंने कहा, ‘कुछ राजपूत वोटों के लिए उन्होंने ऐसा फैसला लिया है जिसका नतीजा आम लोगों को भुगतना होगा. राजपूत समुदाय को भी इस बारे में सोचना चाहिए- कि क्या वे चाहते हैं कि आनंद मोहन जैसा अपराधी राजनीति में उनका प्रतिनिधित्व करे.’
उल्लेखनीय है कि 1994 में गोपालगंज के तत्कालीन जिलाधिकारी जी. कृष्णैया की कथित रूप से आनंद मोहन सिंह द्वारा उकसाई गई भीड़ ने हत्या कर दी थी. गैंगस्टर से नेता बने सिंह को 2007 में बिहार की एक निचली अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी. हालांकि, पटना हाईकोर्ट ने इसे आजीवन कारावास में बदल दिया था, जिसे 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा था.

यह त्रासदी नवंबर 2014 में बिलासपुर ज़िले के नेमिचंद जैन अस्पताल (सकरी), गौरेला, पेंड्रा और मरवाही में आयोजित सरकारी सामूहिक नसबंदी शिविरों के दौरान हुई थी. ज़िला अदालत ने आरोपी सर्जन को ग़ैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया और दो साल की क़ैद, 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया. साथ ही पांच अन्य आरोपियों को बरी कर दिया.

वी-डेम की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के अंत तक दुनिया में 92 तानाशाही वाले देश और 87 लोकतांत्रिक देश मौजूद थे. भारत अभी भी 'चुनावी तानाशाह' बना हुआ है, इस श्रेणी में वह 2017 में शामिल हुआ था. 179 देशों में सें भारत लिबरल डेमोक्रेसी इंडेक्स में 105वें स्थान पर है. पिछले वर्ष यह 100वें स्थान पर था.

बीते 3 फरवरी को बजट सत्र के पहले चरण के दौरान लोकसभा द्वारा पारित एक प्रस्ताव के बाद अनुशासनहीन व्यवहार के लिए सात कांग्रेस सांसदों और एक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद को निलंबित कर दिया गया था. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें इन सदस्यों का निलंबन वापस लेने पर सहमति बनी.

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