
बिल एक, चुनौती अनेक... क्या INDIA ब्लॉक रोक सकता है One Nation-One Election का रास्ता, संसद और विधानसभाओं का गणित क्या कहता है?
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वन नेशन वन इलेक्शन बिल को पहली चुनौती लोकसभा में मिलने वाली है. जहां इस बिल पास कराने के लिए सरकार को 362 वोट चाहिए होंगे, लेकिन यहां NDA सांसदों की संख्या 293 है. राज्यसभा में भी नरेंद्र मोदी सरकार को यही चैलेंज मिलने वाला है. जहां एनडीए के पास पर्याप्त संख्याबल नहीं है.
वन नेशन वन इलेक्शन बिल को लोकसभा में स्वीकार कर लिया गया है. अब इसे संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेज दिया गया है.जेपीसी की सिफारिशें मिलने के बाद अब नरेंद्र मोदी सरकार की अगली चुनौती इसे संसद से पास कराने की होगी.
चूंकि वन नेशन वन इलेक्शन से जुड़ा बिल संविधान संशोधन विधेयक है इसलिए लोकसभा और राज्यसभा में इस बिल को पास कराने के लिए विशेष बहमत की आवश्यकता होगी.
अनुच्छेद 368 (2) के तहत संविधान संशोधनों के लिए विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है. इसका अर्थ है कि प्रत्येक सदन में यानी कि लोकसभा और राज्यसभा में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत द्वारा इस विधेयक को मंजूरी देनी होगी.
वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा इस मुद्दे को स्पष्ट करते हुए कहते हैं, "इस विधेयक को दोनों सदनों के सामने प्रस्तुत किया जाना होगा, और दो-तिहाई सदस्यों को मतदान करना होगा ताकि यह पारित हो सके." पूर्व लोकसभा सचिव पी.डी.टी. अचार्य भी इस बात से सहमत हैं. उन्होंने कहा कि एक संविधान संशोधन बिल होने के नाते इस बिल को इस संवैधानिक प्रक्रिया को पूरा करना होगा.
लोकसभा और राज्यसभा में इस बिल को पास कराना ही सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी.
लोकसभा का नंबरगेम इस तरह है

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