
बाबा रामदेव के खिलाफ अवमानना का मामला क्यों बन गया? जानिए क्या है पतंजलि के विज्ञापन से जुड़ा पूरा विवाद
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सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि मामले में सुनवाई करते हुए योग गुरु बाबा रामदेव को दो हफ्तों के भीतर अदालत में हाजिर होने का आदेश दिया है. ये मामला पतंजलि आयुर्वेद के भ्रामक विज्ञापनों से जुड़ा हुआ है. पहले भी कोर्ट ने बाबा रामदेव को अदालत आने को कहा था, लेकिन न तो वे हाजिर हुए, न ही विज्ञापन बंद हुए थे.
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण को अदालत में दो हफ्तों के भीतर आने का आदेश दिया है. इससे पहले 27 फरवरी को कोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद के विज्ञापनों पर रोक लगा दी थी. ये विज्ञापन ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, आर्थराइटिस, अस्थमा और मोटापे जैसी बीमारियों से जुड़े हुए थे. आरोप है कि एड इस तरह के थे, जो मॉडर्न दवाओं को रोककर पतंजलि का इलाज लेने के लिए उकसाते थे.
क्या है पूरा मामला भ्रामक विज्ञापनों को लेकर पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के खिलाफ इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने एक याचिका जारी की थी, जिसपर एससी सुनवाई कर रही है. अगस्त 2022 में दायर याचिका में एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि पतंजलि ने कोविड के दौरान न केवल वैक्सिनेशन पर निगेटिव बातें कीं, बल्कि मॉडर्न दवाओं के खिलाफ भी मुहिम चलाई.
इस तरह के कई विज्ञापन बने, जो देखने वालों को भ्रमित कर दें. खासकर अपनी दवाओं से कुछ बीमारियों के इलाज का दावा किया. इसी दौरान पतंजलि ने दावा किया था कि उसके प्रोडक्ट्स से कोरोना नहीं होगा, और हो भी तो जल्द ही ठीक हो जाएगा. ये ऐसा क्लेम था, जिसे लेकर डॉक्टर्स काफी नाराज हुए थे.
क्या कहा कोर्ट ने

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