
बांग्लादेश में 13.5 से घटकर 8% से नीचे पहुंची हिंदू आबादी, दो साल में अल्पसंख्यकों पर हमले 65 गुना बढ़े
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बांग्लादेश में 19 दिसंबर को हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या किए जाने की घटना ने देश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. विदेश मंत्रालय के डेटा के अनुसार 2022 में बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर 47 हमले दर्ज किए गए, जो 2023 में बढ़कर 302 हो गए, और फिर 2024 में तेजी से बढ़कर 3,200 हो गए.
बांग्लादेश में 19 दिसंबर को 27 साल के हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या किए जाने की घटना ने देश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों पर हमले लगातार चिंता का विषय रहे हैं. विदेश मंत्रालय के डेटा के अनुसार, 2022 में बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर 47 हमले दर्ज किए गए, जो 2023 में बढ़कर 302 हो गए, और फिर 2024 में तेज़ी से बढ़कर 3200 हो गए.
चटगांव में हिंदू परिवार के घर में आग लगाई गई
मंगलवार को, कुछ लोगों ने चटगांव में एक हिंदू परिवार के घर में आग लगा दी. आग में परिवार के पालतू जानवर मारा गया साथ ही घटनास्थल से एक धमकी भरा नोट भी मिला, जिसमें हिंदुओं पर इस्लाम विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाया गया था और गंभीर परिणामों की चेतावनी दी गई थी. अगस्त 2024 में, बांग्लादेशी-अमेरिकी राजनीतिक विश्लेषक शफकत रब्बी ने IndiaToday.In को बताया, "बांग्लादेश में दशकों से कम तीव्रता वाले सांप्रदायिक तनाव और हिंदुओं के अवसरवादी आर्थिक शोषण का इतिहास रहा है. गरीब हिंदू लोगों की ज़मीन हड़पना भेदभाव का सबसे आम रूप है."
भारत के विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने फरवरी 2025 के शीतकालीन संसद सत्र में कहा था कि पिछले दो महीनों (26 नवंबर, 2024 से 25 जनवरी, 2025 तक) के दौरान, बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों की 76 घटनाएं सामने आई हैं. अगस्त से, बांग्लादेश में हिंदुओं की 23 मौतें और हिंदू मंदिरों पर हमलों की 152 घटनाएं सामने आई हैं. उन्होंने यह भी बताया कि 10 दिसंबर, 2024 को बांग्लादेश सरकार ने एक प्रेस विज्ञप्ति में घोषणा की कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमलों के 88 मामलों के सिलसिले में 70 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और पुलिस जांच में 1254 घटनाओं की पुष्टि हुई है.
बांग्लादेश में घटती चली गई हिंदू आबादी
बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हिंसा के मामलों में हाल के वर्षों में जिस तरह की बढ़ोतरी देखी जा रही है, वह केवल तात्कालिक कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं है, बल्कि देश की सामाजिक-जनसांख्यिकीय संरचना में दशकों से चल रहे बदलावों से भी गहराई से जुड़ी हुई है. सरकारी जनगणना के आंकड़े इस बदलाव की स्पष्ट तस्वीर पेश करते हैं और बताते हैं कि किस तरह समय के साथ अल्पसंख्यक समुदायों की हिस्सेदारी लगातार सिमटती चली गई है.

ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गलीबाफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिका-ईरान वार्ता का दावा फर्जी बताया. उनका कहना है कि यह वित्तीय और तेल बाजार को प्रभावित करने और अमेरिका-इजरायल की रणनीतिक विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए फैलाया गया. ईरान ने किसी भी वार्ता की पुष्टि से इनकार किया.

वेस्ट एशिया में छिड़े युद्ध में आज अमेरिका की तरफ से ऐसे संकेत आए हैं कि जैसे अमेरिका ईरान के सामने थोड़ा झुका हो. अमेरिका ने ईरान के एनर्जी और पावर प्लांट पर हमलों को फिलहाल टाल दिया है. लेकिन सवाल है कि क्यों? अमेरिका और इजरायल का गठबंधन युद्ध के 24 दिनों के बाद भी ईरान को पूरी तरह से झुका नहीं पाया है. शुरुआत में भले ही अमेरिका इजरायल को कामयाबी मिली हो. लेकिन अब तो ऐसा लग रहा है कि जैसे ईरान ने अपने ताकतवर बम युद्ध के इस हिस्से के लिए बचाकर रखे हों. इजरायल के न्यूक्लियर प्लांट तक ईरान के बम गिर रहे हैं. इजरायल का वर्ल्ड क्लास एयर डिफेंस सिस्टम फेल क्यों हो गया.

युद्ध के 24वें दिन आज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चौंकाने वाला बड़ा ऐलान किया. ट्रंप ने कहा कि बीते 2 दिनों से हो रही बातचीत के बाद मैंने ईरानी पावर प्लांट्स पर 5 दिनों के लिए हमले करना रोक दिया है. गौरतलब है कि भारतीय समय से आज रात ही ईरानी पावर प्लांट्स पर हमला करने की ट्रंप की डेडलाइन पूरी हो रही थी. सवाल ये है कि क्या ट्रंप ने अचानक यू टर्न लिया है? अगर ईरान के साथ बीते 2 दिनों से बातचीत हो रही थी तो लगभग 2 दिनों पहले उन्होंने अल्टीमेटम क्यों दिया था? क्यों उन्होंने शक्ति से शांति की बात की थी? सवाल उठ रहा है कि क्या ईरान के तेवरों के आगे ट्रंप एग्जिट रूट ढूंढ रहे हैं? ट्रंप के ऐलान से क्या युद्ध रुक जाएगा? क्या ईरान और इजरायल युद्ध रोकेंगे? ईरान की मीडिया के अनुसार अमेरिका से ईरान का कोई संपर्क नहीं है.

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर संभावित हमलों को पांच दिनों के लिए रोकने का निर्देश दिया, जिसका कारण दोनों देशों के बीच जारी सकारात्मक बातचीत बताया गया. डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान से पांच दिनों के भीतर डील हो सकती है. हालांकि, ईरान इन दावों को खारिज कर रहा है. इससे पहले अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने को लेकर चेतावनी दी थी, जिस पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी.

ईरान लगातार इजरायल को निशाना बना रहा है. यरुशलम में ईरान के हमले की आशंका को लेकर सायरन बजे. आनन-फानन में लोग बम शेल्टर की ओर भागे. ये सायरन ईरान से मिसाइल और ड्रोन हमलों की चेतावनी देते हैं. हमसे ले पहले कुछ मिनटों का ही समय होता है जिसमें इजरायली नागरिक अपने करीबी बम शेल्टर में तब तक शरण लेते हैं जब तक कि खतरा टल न जाए. देखें वीडियो.

ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.






