
बंगाल में विपक्षी पार्टियों को झटका, हाईकोर्ट ने नहीं बढ़ाई पंचायत चुनाव के लिए नामांकन की तारीख
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पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव का मंच सज चुका है. राज्य में हिंसा के बीच नामांकन जारी हैं. इसी बीच कलकत्ता हाईकोर्ट ने विपक्षी पार्टियों को झटका दिया है. हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव के लिए नामांकन की तारीख नहीं बढ़ाई है.
कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल में विपक्षी पार्टियों को झटका दे दिया है. हाईकोर्ट ने राज्य में पंचायत चुनाव के लिए नामांकन की तारीख बढ़ाने से इनकार कर दिया है. बंगाल पंचायत चुनाव की तारीखों की घोषणा होने के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट में दो जनहित याचिकाएं दाखिल की गई थीं. जिनमें पंचायत चुनाव के लिए राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जारी नोटिफिकेशन के कुछ हिस्सों को चुनौती दी गई थी. एक याचिका राज्य कांग्रेस अध्यक्ष अधीररंजन चौधरी ने और दूसरी याचिका शुभेंदु अधिकारी ने दाखिल की थी. बता दें कि पंश्चिम बंगाल में 8 जुलाई को ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद के लिए चुनाव होने हैं.
लोकसभा चुनावों से पहले का लिटमस टेस्ट लोकसभा चुनाव से कुछ महीने पहले होने जा रहे पंचायत चुनाव को आम चुनाव का लिटमस टेस्ट माना जा रहा है. सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) समेत सभी दल इस चुनाव में पूरा जोर लगा रहे हैं. विपक्षी दलों ने पंचायत चुनाव को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी. हाईकोर्ट ने विपक्षी दलों की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य चुनाव आयोग को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराने के निर्देश दिए थे.
नामांकन के लिए उचित समय देने की थी मांग इसके साथ ही कलकत्ता हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव के लिए हाईकोर्ट की ओर से जारी अधिसूचना में निर्धारित समय सीमा को भी अपर्याप्त बताया था और कहा कि हमारे विचार से ये जल्दी में किया गया है. कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग से इस पर विचार करने के लिए भी कहा था. कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि वर्तमान पंचायत का कार्यकाल अगस्त महीने तक है. ऐसे में नामांकन के लिए उचित समय दिया जा सकता है.
इन विचारों के आधार पर दिया फैसला कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करने के साथ इससे जुड़े कई सवाल भी उठाए. पहला मुद्दा नामांकन दाखिल करने की तारीखों को बढ़ाने और या चुनाव कार्यक्रम में किसी तरह के विस्तार के संबंध में था. सवाल यह था कि क्या SEC द्वारा चुनाव का कार्यक्रम तय कर दिए जाने के बाद कोर्ट इसमें हस्तक्षेप कर सकता है? इसके साथ ही अगर शक्ति का मनमाना प्रयोग हो तो क्या की गई किसी भी कार्रवाई को न्यायिक समीक्षा का विषय बनाया जा सकता है.
समय बढ़ाने के विवेक राज्य चुनाव आयोग के पास कोर्ट ने कहा कि, याचिका में 9 जून की अधिसूचना को रद्द करने की मांग की गई है. यदि हम अधिसूचना को रद्द कर देते हैं, तो यह चुनाव पर ही सवाल खड़ा करने जैसा होगा. यह अदालत इस याचिका पर विचार करने के लिए इच्छुक नहीं है. चुनाव के लिए निर्धारित तिथि में परिवर्तन आयोग द्वारा नहीं किया जा सकता है, लेकिन यदि आयोग किसी चुनाव को पूरा करने की तिथि को बढ़ाता है, तो विस्तार की ऐसी शक्ति का प्रयोग किया जा सकता है. कोर्ट ने कहा कि नामांकन दाखिल करने के लिए समय बढ़ाने का निर्देश देने वाले आदेश पर विचार नहीं किया जा सकता है.
इसके साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि, समय बढ़ाने का विवेक पूरी तरह से एसईसी के पास है. एसईसी ऐसे मुद्दे से निपटने के लिए सक्षम है और अदालत इसे आयोग के विवेक पर छोड़ती है.

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