
बंगाल: टीएमसी की महिला कार्यकर्ता पर जानलेवा हमला, जबरन ‘जय श्रीराम’ के नारे लगवाने का आरोप
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पीड़िता फिलहाल मालदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती है और गंभीर चोटों से इलाज करा रही हैं. बताया जा रहा है कि उनके सीने और हाथ पर गहरे जख्म आए हैं. हमले में उनके पति भी घायल हुए. परिजनों का कहना है कि उनका परिवार लंबे समय से टीएमसी से जुड़ा हुआ है और इसी राजनीतिक कारण से उन पर हमला किया गया.
पश्चिम बंगाल के मालदा ज़िले में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की महिला कार्यकर्ता पर हुए हमले को लेकर राजनीति गरमा गई है. टीएमसी ने आरोप लगाया है कि मोथाबाड़ी थाने के अंतर्गत रथबाड़ी क्षेत्र में स्थानीय बीजेपी समर्थकों ने महिला कार्यकर्ता सुशमा मंडल राय और उनके पति बापी राय पर हमला किया. आरोप है कि हमलावरों ने धारदार हथियार से वार किया, उनका बायां हाथ काटने की कोशिश की और उन्हें ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाने के लिए मजबूर किया.
पीड़िता फिलहाल मालदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती है और गंभीर चोटों से इलाज करा रही हैं. बताया जा रहा है कि उनके सीने और हाथ पर गहरे जख्म आए हैं. हमले में उनके पति भी घायल हुए. परिजनों का कहना है कि उनका परिवार लंबे समय से टीएमसी से जुड़ा हुआ है और इसी राजनीतिक कारण से उन पर हमला किया गया.
इस घटना को लेकर टीएमसी ने बीजेपी पर सीधा हमला बोला है. पार्टी ने अपने आधिकारिक ट्विटर (X) अकाउंट से दावा करते हुए लिखा, “हिंसा और खूनी खेल बीजेपी की आदत बन चुकी है. मालदा के मोथाबाड़ी में उनके गुंडों ने एक तृणमूल समर्थक महिला पर हमला किया. पहले सड़क पर उन्हें परेशान किया, फिर धारदार हथियार से हमला कर दिया, जिससे उनके सीने और हाथ पर गहरे जख्म आए. उनके पति को भी नहीं बख्शा गया."
इसमें आगे कहा गया, "कौन सी पार्टी महिलाओं पर इस तरह के हथियारबंद गुंडे छोड़ती है? कौन सी ‘सभ्यता’ इस तरह की बर्बरता का जश्न मनाती है? ये बीजेपी के गुंडे, जो क्रूरता और खूनी मानसिकता से प्रशिक्षित हैं, लोकतंत्र पर कलंक हैं. वे केवल डर, नफरत और हिंसा पर जीते हैं क्योंकि उनके पास देने के लिए कुछ नहीं है. बंगाल कभी भी ऐसी गुंडागर्दी के आगे नहीं झुकेगा."
वहीं, दक्षिण मालदा ज़िला बीजेपी अध्यक्ष अजय गांगुली ने इस घटना को राजनीतिक रंग देने से इनकार किया और कहा कि यह मामला गांव का आपसी विवाद है, राजनीति से इसका कोई लेना-देना नहीं.
उन्होंने कहा कि यह मामला राजनीति से जुड़ा नहीं है बल्कि एक सामान्य गांव का विवाद है. चुनाव नजदीक हैं, इसलिए तृणमूल कांग्रेस इस तरह के आरोप लगाकर सहानुभूति बटोरने की कोशिश कर रही है.

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