
फास्ट ट्रैक कोर्ट में ट्रायल, 180 गवाह और पुख्ता सबूत... कब मिलेगी श्रद्धा के गुनहगार आफताब को सजा?
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दिल्ली के महरौली में श्रद्धा के लिव इन पार्टनर आफताब ने रिश्ते में अनबन के चलते 18 मई 2022 को उसकी हत्या कर दी थी. 12 नवंबर 2022 को इस मामले का खुलासा हुआ और दिल्ली पुलिस ने 75 दिनों में इसकी जांच पूरी कर दिल्ली के साकेत कोर्ट में 6 हजार 629 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी.
Shraddha Murder Case: पूरे देश को दहला देने वाले श्रद्धा मर्डर केस की सुनवाई आखिरकार सात महीने बाद दिल्ली की फास्ट ट्रैक कोर्ट में शुरू हो गई है. या यूं कहा जाए कि अदालत में इंसाफ के लिए जंग की शुरुआत हो ही गई. मामले का ट्रायल शुरू हुआ और सात महीने बाद ही श्रद्धा के घरवालों को ये उम्मीद बंधी है कि अब आनेवाले वक्त में उनकी बेटी के कातिल आफताब अमीन पूनावाला को फांसी के तख्ते पर लटका दिया जाएगा.
फास्ट टैक कोर्ट में सुनवाई शुरू दिल्ली के महरौली में श्रद्धा के लिव इन पार्टनर आफताब ने रिश्ते में अनबन के चलते 18 मई 2022 को उसकी हत्या कर दी थी. 12 नवंबर 2022 को इस मामले का खुलासा हुआ और दिल्ली पुलिस ने 75 दिनों में इसकी जांच पूरी कर दिल्ली के साकेत कोर्ट में 6 हजार 629 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी. इसके बाद गुरुवार 1 जून को फास्ट टैक कोर्ट में इस मामले की सुनवाई शुरू हुई.
तीन अहम गवाहों के बयान दर्ज ट्रायल की पहली तारीख यानी 1 जून को इस कोर्ट में अभियोजन पक्ष की ओर से श्रद्धा के भाई श्रीजय समेत तीन गवाह पेश किए. जिन्होंने अपनी-अपनी गवाही दी. श्रीजय ने कोर्ट को बताया कि श्रद्धा ने अपने जीते जी उससे आफताब को लेकर कई बार शिकायतें की थीं और इन शिकायतों में ये बताया था कि आफताब ना सिर्फ उससे झगड़ा करता है, बल्कि शारीरिक तौर पर भी उसे प्रताड़ित करता है यानी उसके साथ मारपीट करता है. कोर्ट में श्रीजय के अलावा और दो गवाहों ने भी अपनी बात रखी. जिसके बाद अदालत ने 12, 17 और 18 जुलाई को सुनवाई की अगली तीन तारीखें मुकर्रर कीं. इन तारीखों पर जहां बचाव पक्ष के वकील गवाहों से जिरह करेंगे, वहीं कम से कम पंद्रह और गवाहों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे.
अभी बाकी हैं कई सवाल लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ये पूरी की पूरी कानूनी प्रक्रिया कब तक पूरी कर ली जाएगी? अगर लोअर कोर्ट में आफताब को गुनहगार पाया जाता है और उसकी करतूत को देखते हुए उसे फांसी की सजा दी जाती है, तो उसे सचमुच फांसी पर लटकाए जाने में कितना वक्त लगेगा? हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में अपना आखिरी फैसला सुनाने में कितना समय लगेगा? और अगर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट भी उसकी सज़ा बरकरार रखता है, तो फिर आखिर कब तक उसे फांसी कब होगी?
नहीं लगेगा निर्भया जितना वक्त जाहिर है इन यक्ष प्रश्नों का साफ-साफ जवाब क्या है, फिलहाल किसी को पता नहीं. लेकिन श्रद्धा के पिता की तरफ से अदालत में मामले की पैरवी कर रही उनकी वकील सीमा कुशवाहा को उम्मीद है कि आफताब की फांसी में कम से कम उतना वक्त नहीं लगेगा, जितना निर्भया के गुनहगारों को फांसी के फंदे तक पहुंचाने में लगा था.
लंबी हो सकती है कानूनी प्रक्रिया वैसे लोअर कोर्ट से फैसला आने के बाद आफताब के पास हाई कोर्ट जाने के लिए अधिकतम तीन महीने का वक्त होगा और अगर हाई कोर्ट से भी फैसला उसके खिलाफ आ जाए, तो सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए उसे और तीन महीने मिलेंगे. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट का फैसला, फैसले बाद दया याचिका, क्यूरेटिव पिटिशन, रिव्यू पिटिशन जैसी तमाम प्रक्रियाएं चलेंगी और हो सकता है कि इसके बाद आफताब राष्ट्रपति के पास भी अपनी अर्जी लगाए और कहीं अगर वो अर्जी भी खारिज हो गई, तो फिर से सुप्रीम कोर्ट. जाहिर है, ये प्रक्रिया लंबी है. हालांकि वॉल्कर परिवार के वकील को लगता है कि चूंकि निर्भया के मामले में मुल्जिमों की तादाद चार थी, इसलिए वो मामला ज्यादा लंबा खिंच गया, लेकिन इस मामले में शायद ऐसा ना हो.

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