
फर्जी फर्म, विदेशों तक सप्लाई और पांच FIR... कोडीन कफ सिरप के शातिर तस्कर शुभम जायसवाल की पूरी कहानी
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गाजियाबाद, वाराणसी, झारखंड और बिहार तक फैले शुभम जायसवाल के कोडीन मिक्स कफ सिरप तस्करी नेटवर्क का खुलासा हैरान करने वाला है. इस मामले में अब तक 5 FIR दर्ज की गई हैं. फर्जी फर्में, अंतरराज्यीय सप्लाई, और दुबई भागने वाले मुख्य आरोपी की पूरी कहानी.
Shubham Jaiswal Codeine Racket: मध्य प्रदेश में कफ सिरप पीने से कई मासूम बच्चों की जान चली गई. इसके बाद अब उत्तर प्रदेश में छापेमारी और गिरफ्तारी का सिलसिला शुरू हुआ. इसी दौरान पता चला कि वाराणसी का एक दवा व्यापारी इस काले धंधे का मास्टरमाइंड था. दरअसल, कोडीन मिक्स कफ सिरप की सप्लाई के इस सिंडिकेट को शुभम जायसवाल नाम का शातिर कारोबारी फर्जी फर्मों के जरिए चला रहा था.
छानबीन में खुलासा हुआ कि शुभम ने गाजियाबाद और वाराणसी में गोदाम बना रखे थे, वहीं से कफ सिरप की सप्लाई उत्तर प्रदेश से झारखंड, पश्चिम बंगाल से बांग्लादेश और बिहार से नेपाल तक की जा रही थी. कोडीन मिक्स कफ सिरप के इस जानलेवा धंधे का सबसे बड़ा मास्टरमाइंड वाराणसी का शुभम जायसवाल और उसके पिता भोला प्रसाद ही थे. पुलिस की जांच में उनके नाम सामने आए हैं. फिलहाल, शुभम जायसवाल पर गाजियाबाद और वाराणसी में एफआईआर दर्ज कर ली गई है. शुभम जायसवाल फरार है और यूपी पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स भी उसकी तलाश कर रही है.
यूपी में कोडीन मिक्स कफ सिरप सप्लाई के मामले में आगरा, लखनऊ, कानपुर और जौनपुर में फर्जी फर्म से कफ सिरप सप्लाई की एफआईआर दर्ज हुई है. इस मामले की जांच से एक संगठित गिरोह का पता चला है.
कैसे पकड़ा गया तस्करी का नेटवर्क? 18 अक्टूबर को सोनभद्र के रॉबर्ट्सगंज में आबकारी निरीक्षक ने राजस्थान और महाराष्ट्र नंबर वाले दो कंटेनर पकड़े. जांच में पता चला कि कंटेनर में नमकीन और चिप्स के पैकेटों के पीछे ESKUF कोडीन मिक्स कफ सिरप की 11,967 बोतलें छिपाकर झारखंड भेजी जा रही थीं. ट्रक ड्राइवर और मालिक से पूछताछ में सामने आया कि यह माल शुभम जायसवाल की फर्म से गाजियाबाद के आसिफ और वसीम के जरिए भेजा गया था. यह खेप गाजियाबाद के एक गोदाम में लोड की गई थी. मामला गंभीर लगा तो पुलिस ने तुरंत जानकारी डीजीपी मुख्यालय को भेजी.
डीजीपी के आदेश पर जांच यूपी के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने नेटवर्क की गंभीरता देखते हुए गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर को विस्तृत जांच का आदेश दिया. पुलिस ने 15 दिन की पड़ताल के बाद 4 नवंबर को नंदग्राम थाने में इंस्पेक्टर अनिल कुमार राजपूत की शिकायत पर केस दर्ज किया. इस एफआईआर में कुल 17 लोग नामजद किए गए, जिनमें शुभम जायसवाल भी शामिल है. जांच के दौरान पुलिस को कई अहम लिंक और कागजी फर्जीवाड़े के संकेत मिले, जिसके बाद छापेमारी का दायरा बढ़ाया गया.
3.5 करोड़ का माल और माफिया से कनेक्शन एफआईआर में दर्ज है कि छापेमारी के दौरान पुलिस ने करीब 3.5 करोड़ रुपये का कोडीन युक्त कफ सिरप बरामद किया. पूछताछ में पता चला कि यह पूरा माल वाराणसी के शुभम जायसवाल का था. जब पुलिस ने शुभम की बैकग्राउंड खंगाली तो सामने आया कि वह पूर्वांचल के एक बड़े माफिया का करीबी है. यह जानकारी तुरंत डीजीपी मुख्यालय को भेजी गई. इसके बाद मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी गई.

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