
प्लासी की लड़ाई: गद्दार सेनापति, ना-तजुर्बेकार नवाब और बारिश... गंगा किनारेवाली वो जंग जिसने खोला भारत की गुलामी का दरवाजा
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प्लासी की लड़ाई. आज से ठीक 266 साल पहले लड़े गए इस युद्ध के नतीजों ने हिन्दुस्तान की गुलामी का दरवाजा खोल दिया. ये लड़ाई एक नातजुर्बेकार नवाब सिराजुद्दौला और एक शातिर अंग्रेज सैन्य अधिकारी क्लाइव के बीच लड़ी गई थी. इस लड़ाई में वफादारियों के बिकने की कहानी है, साजिशें हैं और वो गद्दारी है जिसकी वजह से हिन्दुस्तान पर ईस्ट इंडिया कंपनी का राज पुख्ता हो गया.
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल कहा करते थे- 'इतिहास पढ़ो, इतिहास पढ़ो. इतिहास में ही सत्ता चलाने (Statecraft) के सारे रहस्य छिपे हैं'. फ्रांसीसी विचारक जीन बोडिन कहते हैं कि इतिहास का अध्ययन राजनीतिक ज्ञान हासिल करने की कला की शुरुआत है. दरअसल इतिहास के धूल भरे पन्नों को पलटना उबाऊ और नीरस लग सकता है लेकिन इन पन्नों में छिपे सबक ही हमें सुरक्षित भविष्य का भरोसा देते हैं.
266 साल पुरानी बात कौन करना चाहेगा? लेकिन आज हम क्या बात करेंगे ये तो हमारा गुजरा हुआ कल तय करता है. उस रोज की एक जंग ने और उसी दरमियान हुए कुछ घंटों की एक बारिश ने हिन्दुस्तान का मुस्तकबिल तय कर दिया और हमें 190 और सालों की गुलामी में धकेल दिया. जंग के लिए हमारा नवाब तो तैयार था लेकिन नवाबी रंग-ढंग में डूबे बंगाल के इस सूबेदार ने कई गलतियां की.
उस दिन बारिश को जंग के दौरान ही आना था. दोनों ओर से तोपें गरज रही थी, बंदूकें चल रही थीं. तभी बादल गरज उठे. तेज वर्षा शुरू हो गई. अंग्रेजों का मैनेजमेंट और हूनर आज नहीं, तब से ही मशूहर था. उन्होंने तुरंत तारपोलिन से अपने गोले-बारूद और तोपों को ढक दिया. भीगे गोले और बारूद जंग में भला किस काम के. ब्रिटिश कमांडरों ने तुरंत सतर्कता दिखाई. लेकिन बंगाल का नवाब सिराजुद्दौला ये होशियारी न दिखा सका. तोप के सारे बड़े-बड़े गोले भीग कर गोबर हो गए. बारिश थमी. युद्ध एक बार फिर शुरू हुआ. नवाब के सिपाहियों ने जब गोलों को तोप में डालकर चार्ज किया तो सारे फुस्स...
संख्या में बीस मगर रणनीति और तजुर्बे में उन्नीस
ये घोर लापरवाही थी. अंग्रेजों की तोप आग उगल रही थी. हाहाकर मचा रहा था. नवाब के सैनिक ढेर हो रहे थे. आखिरकार सुबह शुरू हुई ये जंग शाम होने से पहले मुकम्मल हो गई. बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला को इस लड़ाई से भागना पड़ा. संख्या में बीस मगर रणनीति और तजुर्बे में अठारह-उन्नीस रहने के कारण बंगाल ये जंग हार गया.
दुनिया इस टक्कर को प्लासी की लड़ाई के नाम से जानती है. तारीख थी 23 जून 1757. आज से ठीक 266 साल पहले. दुनिया भर के सैन्य इतिहासकर इस जंग का अपने-अपने नजरिये से पोस्टमार्टम करते हैं.

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