
पेट्रोल-डीज़ल के दामों में बढ़ोतरी के ख़िलाफ़ वाम दलों ने 15 दिन के विरोध-प्रदर्शन की घोषणा की
The Wire
चार मई के बाद पेट्रोलियम उत्पादों के दामों में 23 बार वृद्धि हो चुकी है और सात राज्यों में पेट्रोल की क़ीमत 100 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच चुकी है. शुक्रवार को कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पेट्रोल एवं डीज़ल के दामों में वृद्धि के विरोध में दिल्ली समेत कई राज्यों में विभिन्न पेट्रोल पंपों के पास सांकेतिक प्रदर्शन किया था.
नई दिल्ली: पेट्रोल-डीजल के दामों में हुई भारी वृद्धि वापस लेने और पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाने की मांग करते हुए देशभर के पेट्रोल पंपों के पास कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा शुक्रवार को विरोध किए जाने के बाद अब वाम दलों ने 15 दिन तक विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है. Left Parties All India anti price rise protests:June 16-30. ◆control prices of all essential commodities & drugs. ◆roll back hiked petroleum duties. ◆WPI 11year high.◆Provide ₹7.5K/month cash transfers, 10kg food grains per month/person+food kit-pulses, edible oil, etc. pic.twitter.com/0oBfgXetDf GDP crashing,Unemployment soaring,Fuel prices skyrocketing. महामारी के दौरान मोदी सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर टैक्स वसूले: 2.74 लाख करोड़ पेट्रोल डीजल की बढ़ती कीमतों के खिलाफ @RahulGandhi जी के आह्वान पर सीतापुर कांग्रेस का आक्रोश प्रदर्शन ! @INCSitapur @INCUttarPradesh @AjayLalluINC @ZubairKhan_INC pic.twitter.com/KcUmUp2Q5J द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, वाम दलों ने ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी को वापस लेने और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करने की मांग को लेकर 16 से 30 जून तक 15 दिनों के विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है. — Sitaram Yechury (@SitaramYechury) June 13, 2021 In how many more ways is #BJPLootingIndia ? इस पैसे से क्या मिल सकता था- — shamina shafiq (@shaminaaaa) June 11, 2021 पांच वाम दलों के महासचिवों- माकपा के सीताराम येचुरी, भाकपा के डी. राजा, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक के देवव्रत विश्वास, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के मनोज भट्टाचार्य और भाकपा-माले पार्टी के दीपांकर भट्टाचार्य द्वारा हस्ताक्षरित एक संयुक्त बयान में बताया गया कि हाल ही में 2 मई को हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे घोषित होने के बाद से पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें 21 गुना बढ़ गई हैं. — Rahul Gandhi (@RahulGandhi) June 11, 2021 पूरे भारत को वैक्सीन (67000 करोड़)+718 जिलों में ऑक्सीजन प्लांट+29 राज्यों में एम्स अस्पताल+25 करोड़ गरीबों को 6000 रू की मदद मगर मिला कुछ भी नहीं।#BJPLootingIndia
यह त्रासदी नवंबर 2014 में बिलासपुर ज़िले के नेमिचंद जैन अस्पताल (सकरी), गौरेला, पेंड्रा और मरवाही में आयोजित सरकारी सामूहिक नसबंदी शिविरों के दौरान हुई थी. ज़िला अदालत ने आरोपी सर्जन को ग़ैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया और दो साल की क़ैद, 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया. साथ ही पांच अन्य आरोपियों को बरी कर दिया.

वी-डेम की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के अंत तक दुनिया में 92 तानाशाही वाले देश और 87 लोकतांत्रिक देश मौजूद थे. भारत अभी भी 'चुनावी तानाशाह' बना हुआ है, इस श्रेणी में वह 2017 में शामिल हुआ था. 179 देशों में सें भारत लिबरल डेमोक्रेसी इंडेक्स में 105वें स्थान पर है. पिछले वर्ष यह 100वें स्थान पर था.

बीते 3 फरवरी को बजट सत्र के पहले चरण के दौरान लोकसभा द्वारा पारित एक प्रस्ताव के बाद अनुशासनहीन व्यवहार के लिए सात कांग्रेस सांसदों और एक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद को निलंबित कर दिया गया था. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें इन सदस्यों का निलंबन वापस लेने पर सहमति बनी.

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बीते 3 फरवरी को बजट सत्र के पहले चरण के दौरान लोकसभा द्वारा पारित एक प्रस्ताव के बाद अनुशासनहीन व्यवहार के लिए सात कांग्रेस सांसदों और एक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद को निलंबित कर दिया गया था. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें इन सदस्यों का निलंबन वापस लेने पर सहमति बनी.

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मनरेगा के राज्य-स्तरीय तथ्य एक राजनीतिक रूप से असहज स्वरूप दिखाते हैं. यह कार्यक्रम उन इलाकों में सबसे सफल नहीं रहा जहां ज़रूरत सबसे ज़्यादा थी, बल्कि वहां बेहतर रहा जहां प्रशासनिक ढांचा मज़बूत और राजनीतिक इच्छाशक्ति स्पष्ट थी. केरल और ओडिशा के आंकड़े बताते हैं कि मनरेगा अधिकार से अधिक प्रशासनिक योजना बन गई है, ऐसे में वीबी-जी राम जी को क्या अलग करना होगा?

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