
पहले ही चुनाव में हार से 10वीं बार CM बनने तक... सियासत के सिकंदर नीतीश कुमार की पूरी कहानी
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कभी लालू यादव के साथी रहे नीतीश कुमार अब बिहार में सियासत के सबसे बड़े सिकंदर बन चुके हैं. वह अबकी बार 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. यह नया रिकॉर्ड होगा. हालांकि उनके नौवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने का रिकॉर्ड भी अभी तक कोई नहीं तोड़ पाया.
बिहार की सियासत में अगर कोई कहानी सबसे दिलचस्प, सबसे उलझी हुई और सबसे अप्रत्याशित है तो वो है नीतीश कुमार की. एक ऐसा नेता जिसने आंदोलनकारी से लेकर लोकप्रिय मुख्यमंत्री तक का सफर तय किया. कभी केंद्र की राजनीति बदली तो कभी बिहार का चेहरा बदला, विचार बदले, समीकरण बदले, दोस्त बदले, दुश्मन बदले. लेकिन एक चीज हमेशा कायम रही- नीतीश कुमार का असर.
बिहार में इस बार की जीत सिर्फ एक चुनावी नतीजा नहीं बल्कि बिहार की राजनीति में आई सुनामी का नाम है. नीतीश कुमार ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह सिर्फ नेता नहीं, पूरे राजनीतिक परिदृश्य के गेम चेंजर हैं. जिस मुकाबले को कांटे की टक्कर बताया जा रहा था, उसमें उन्होंने ऐसी लहर खड़ी की कि विरोधियों के पैर ही उखड़ गए. इस जीत ने साफ कर दिया है अनुभव, रणनीति और भरोसा... यह तीनों जब एक ही नेता में मिलते हैं तो नतीजे इतिहास में दर्ज होते हैं.
अक्टूबर 2005 में हुए चुनाव में जेडीयू को 88 सीटें मिलीं. 2010 में जेडीयू ने कमाल कर दिया और 115 सीटें हासिल कीं. 2015 में जब 71 सीटें आईं तो कहा गया कि नीतीश कुमार का जादू खत्म हो रहा है. और 2020 में जब सिर्फ 43 सीटें मिलीं तो कई राजनीतिक पंडितों ने कहा कि नीतीश की सियासत अब समाप्त होने के दिन आ गए. लेकिन 2025 में 85 सीटें लेकर नीतीश ने बता दिया दबदबा था और दबदबा रहेगा. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अबकी बार 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. यह नया रिकॉर्ड होगा. हालांकि उनके नौवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने का रिकॉर्ड भी अभी तक कोई नहीं तोड़ पाया.
कौन कितनी बार बना मुख्यमंत्री
तमिलनाडु की मुख्यमंत्री रही जयललिता और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह ने छह-छह बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. सिक्किम के मुख्यमंत्री रहे पवन कुमार चामलिंग, ओसा के मुख्यमंत्री रहे नवीन पटनायक और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री रहे ज्योति बसु ने पांच-पांच बार शपथ ली थी.
कभी लालू यादव के साथी रहे नीतीश कुमार अब बिहार में सियासत के सबसे बड़े सिकंदर बन चुके हैं. वो नेता जिसने कभी किसी और के लिए पोस्टर लगाए, आज खुद बिहार की राजनीति का सबसे मजबूत चेहरा बन गए हैं. जेपी आंदोलन से लेकर पार्टी बनाने तक, उस वक्त से नीतीश को हर मोड़ पर परख और हर बार उन्होंने खुद को नए सिरे से गड़ा है.

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