
पहले सख्त कानून का हुआ था विरोध, कानून अब भी मौजूद, लेकिन रुक नहीं रहे सड़क हादसे
AajTak
केंद्र सरकार ने सड़क हादसों को लेकर नए कानून में सख्त प्रावधान किए थे. इसके विरोध में ट्रक चालक, डंपर चालक, कैब ड्राइवर्स ने हड़ताल कर दी थी. सड़क हादसों को लेकर कानून अब भी है, लेकिन हादसे हैं कि रुक नहीं रहे.
करीब दो साल पहले सड़क हादसों पर लगाम लगाने के लिए परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने सख्त कानून की पैरवी की थी. सख्त कानून आया भी, लेकिन ट्रक और डंपर चालकों के साथ ही कैब चालक हड़ताल पर उतर आए. वाहनों के पहिए जाम हो गए. गृह मंत्रालय ने चालकों को आश्वस्त किया कि ये कानून अभी लागू नहीं होंगे और इसके बाद हड़ताल समाप्त हो सकी थी. ये कानून लागू नहीं हुए और सड़क हादसे हैं कि रुकने का नाम नहीं ले रहे.
नए कानून में हादसों को लेकर क्या था प्रावधान
नए कानून में हिट एंड रन को लेकर यह प्रावधान किया गया था कि अगर कोई ट्रक या डंपर चालक किसी को कुचलकर भागता है, तो उसके लिए 10 साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया था. बीएनएस की धारा 104 (2) में कहा गया था कि कोई भी लापरवाही से वाहन चलाने की वजह से मौत गैर इरादतन हत्या की श्रेणी में आती है. इस कानून में घटना के तुरंत बाद किसी पुलिस अधिकारी या मजिस्ट्रेट को जानकारी देना अनिवार्य करते हुए भाग जाने की स्थिति में 10 वर्ष की कैद और जुर्माने का प्रावधान किया गया था.
सड़क हादसों को लेकर क्या है वर्तमान कानून
सड़क हादसों को लेकर आईपीसी की धारा 279, 304ए और 338 के तहत प्रावधान हैं. धारा 279 लापरवाही से वाहन चलाने, 304ए लापरवाही से मौत और 338 जान जोखिम में डालने से संबंधित है. से संबंधित है. इन धाराओं के तहत मामला दर्ज होने पर आरोपी चालक को कुछ ही दिनों में जमानत मिल जाती है. इस कानून के तहत भी दो साल की सजा का प्रावधान है.
यह भी पढ़ें: राजस्थान में तेज रफ्तार थार का कहर! शादी से लौट रहे एक ही परिवार के 5 लोगों को मारी टक्कर, 4 की दर्दनाक मौत

सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी द्वारा लागू किए गए नए नियमों पर रोक लगा दी है. छात्रों ने इस फैसले का स्वागत किया है और कहा कि यूजीसी का यह कानून छात्रों में भेदभाव उत्पन्न करता है. छात्रों का कहना है कि वे नियमों में बदलाव नहीं बल्कि पुराने नियमों को वापस चाहते हैं. यदि नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया तो वे भविष्य में भी प्रदर्शन जारी रखेंगे.

जोधपुर में साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत के बाद उनके पैतृक गांव में समाधि दी जाएगी. जुकाम के इलाज में लगाए गए इंजेक्शन के महज 30 सेकंड बाद तबीयत बिगड़ने से मौत का दावा किया जा रहा है. घटना से संत समाज में गहरी नाराजगी है. संतों ने निष्पक्ष जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और सोशल मीडिया पर अनर्गल लिखने वालों पर कार्रवाई की मांग की है.

दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने सार्वजनिक शिकायतों के निपटारे में लापरवाही के आरोपों पर राजेंद्र नगर, कन्हैया नगर और अशोक विहार के जोनल रेवेन्यू अधिकारियों और कन्हैया नगर के एक असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर को सस्पेंड कर दिया. अचानक निरीक्षण में प्रशासनिक खामियां मिलने के बाद उन्होंने विभागीय कार्रवाई और प्रभावित जोनों में तत्काल नए अधिकारियों की तैनाती के आदेश दिए हैं.

देश के शिक्षण संस्थानों में दलित और आदिवासी छात्रों और शिक्षकों के साथ होने वाले भेदभाव को खत्म करने के लिए विश्विद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने नए नियम लागू किए थे, जिसे लेकर विरोध इतना बढ़ गया कि मामला अदालत तक पहुंच गया. सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है, जिसे लेकर राजनीतिक दलों के नजरिए अलग-अलग दिखे.

दक्षिण मुंबई के फोर्ट इलाके में पुलिसकर्मी बनकर एक केन्याई महिला से 66 लाख रुपये की ठगी करने के मामले में पुलिस ने ठाणे से 48 वर्षीय सुरेश रंगनाथ चव्हाण को गिरफ्तार किया है. उसका एक साथी अभी फरार है. 21 जनवरी को एम. जी. रोड पर आरोपी ने अपने साथी के साथ महिला की टैक्सी रोककर जांच के बहाने 66.45 लाख रुपये से भरे बैग जब्त किए और पुलिस स्टेशन चलने का कहकर फरार हो गया.








