
पहलगाम हमला बता रहा है कि धारा 370 और सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भी बहुत काम बाकी है
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पहलगाम हमला 26/11 के बाद सबसे बड़ा आतंकी अटैक है जिसमें आम लोगों को टार्गेट किया गया है, और 2019 में जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने के बाद ये सबसे बड़ा आतंकवादी हमला है - और सवाल वही है, हर बार चूक कहां रह जाती है?
हथियारबंद आतंकियों ने पहलगाम की बैसरन घाटी के पास घुड़सवारी कर रहे सैलानियों पर अंधाधुंध फायरिंग की, और चुन चुन कर 28 बेकसूरों को मार डाला. अगस्त, 2019 में जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाये जाने के बाद ये सबसे बड़ा आतंकवादी हमला है - और 26/11 के मुंबई हमले के बाद ये सबसे बड़ा आतंकी अटैक है, जिसमें आम लोगों को टार्गेट किया गया है.
हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े टीआरएफ यानी 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' ने ली है. पुलिस की वर्दी में अत्याधुनिक हथियारों से लैस हमलावरों ने सैर सपाटे के लिए पहुंचे लोगों की हत्या से पहले उनका धर्म भी पूछा. चेक करने के लिए कलमा पढ़ने को कहा, और फिर गोली मार दी.
पाकिस्तान ने हमले से पल्ला झाड़ लिया है, लेकिन सोशल मीडिया पर ये दावा किया जा रहा है कि सरहद के पास पाकिस्तान ने फौजी गतिविधियां बढ़ा दी है, और लड़ाकू विमानों के भी उड़ान भरने के स्क्रीनशॉट शेयर किये जा रहे हैं - अभी क्या चल रहा है, इसकी पुष्टि भले न हुई हो, लेकिन 2019 के पुलवामा हमले के बाद ये सब तो हुआ ही था.
बार बार ऐसी बड़ी चूक क्यों, और कैसे हो जाती है?
पहलगाम के जिस बैसरन इलाके में आतंकी हमला हुआ है, वहां न तो किसी तरह की सिक्योरिटी मॉनिटरिंग के इंतजाम किये गये थे, न ही कोई सुरक्षा बंदोबस्त.
आतंकियों को तो ऐसे ही मौके की तलाश थी. और, वे अपने मंसूबों को अंजाम देने में कामयाब हो गये - बार बार सवाल यही उठता है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में आखिर किस बात की कमी हर बार रह जाती है?

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