
पंजाब: किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने पार्टी बनाई, विधानसभा चुनाव में उतरेंगे
The Wire
संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य और हरियाणा भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने ‘संयुक्त संघर्ष पार्टी’ की घोषणा की है. उनके इस क़दम से एसकेएम में उनके भविष्य पर सवाल उठ रहे हैं क्योंकि मोर्चे के नेता डॉ. दर्शन पाल कह चुके हैं कि राजनीति में जाने वाले किसानों को एसकेएम छोड़ना होगा.
चंडीगढ़: किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने शनिवार को अपनी राजनीतिक पार्टी ‘संयुक्त संघर्ष पार्टी’ बनाने की घोषणा करते हुए कहा कि यह अगले साल होने वाले पंजाब विधानसभा का चुनाव लड़ेगी. उन्होंने राज्य में अफीम की खेती किए जाने की वकालत की.
चढ़ूनी संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के सदस्य हैं, जो 40 किसान संघों का संगठन है. एसकेएम ने केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ एक साल तक चले किसानों के आंदोलन का नेतृत्व किया. बाद में इन कानूनों को निरस्त कर दिया गया.
चढ़ूनी के इस कदम से एसकेएम में उनके भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं, जैसा कि द वायर ने एक रिपोर्ट में बताया था कि एसकेएम नेता डॉ. दर्शन पाल पहले ही कह चुके हैं कि जो किसान राजनीति में जाना चाहते हैं उन्हें एसकेएम छोड़ देना चाहिए.
चढ़ूनी ने हरियाणा में तीन कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन का नेतृत्व करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

यह त्रासदी नवंबर 2014 में बिलासपुर ज़िले के नेमिचंद जैन अस्पताल (सकरी), गौरेला, पेंड्रा और मरवाही में आयोजित सरकारी सामूहिक नसबंदी शिविरों के दौरान हुई थी. ज़िला अदालत ने आरोपी सर्जन को ग़ैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया और दो साल की क़ैद, 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया. साथ ही पांच अन्य आरोपियों को बरी कर दिया.

वी-डेम की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के अंत तक दुनिया में 92 तानाशाही वाले देश और 87 लोकतांत्रिक देश मौजूद थे. भारत अभी भी 'चुनावी तानाशाह' बना हुआ है, इस श्रेणी में वह 2017 में शामिल हुआ था. 179 देशों में सें भारत लिबरल डेमोक्रेसी इंडेक्स में 105वें स्थान पर है. पिछले वर्ष यह 100वें स्थान पर था.

बीते 3 फरवरी को बजट सत्र के पहले चरण के दौरान लोकसभा द्वारा पारित एक प्रस्ताव के बाद अनुशासनहीन व्यवहार के लिए सात कांग्रेस सांसदों और एक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद को निलंबित कर दिया गया था. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें इन सदस्यों का निलंबन वापस लेने पर सहमति बनी.

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