
नेपाल: ओली ने हाथ खींचे... फिर भी क्यों खतरे में नहीं प्रचंड सरकार?
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नेपाल की प्रचंड सरकार से केपी शर्मा ओली की अगुवाई वाले सीपीएन-यूएमएल के समर्थन वापस लेने का मुख्य कारण राष्ट्रपति पद के लिए प्रचंड का नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ उम्मीदवार रामचंद्र पौडेल को समर्थन देने का फैसला है.
नेपाल में नई सरकार के गठन के महज दो महीनों के भीतर पूर्व प्रधानमंत्री केपी ओली की पार्टी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएन-यूएमएल) ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया है. लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसके बावजदू पीएम पुष्प कमल दहल प्रचंड सरकार को कोई खतरा नहीं है.
संवैधानिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि प्रचंड गठबंधन सरकार को अभी भी नेपाली कांग्रेस के 89 सदस्यों और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के 20 सांसदों का समर्थन है.
प्रचंड सरकार से केपी शर्मा ओली की अगुवाई वाले सीपीएन-यूएमएल के समर्थन वापस लेने का मुख्य कारण राष्ट्रपति पद के लिए प्रचंड का नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ उम्मीदवार रामचंद्र पौडेल को समर्थन देने का फैसला है.
नेपाल के 275 सदस्यीय सदन में यूएमएल के 79 सांसद जबकि सीपीएन के 32 सांसद हैं. सीपीएन (यूनिफाइड सोशलिस्ट) के 10 और आरएसपी के 20 सांसद हैं. वहीं जनमत पार्टी के छह, लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के चार और नागरिक उन्मुक्ति पार्टी के तीन सांसद हैं.
आरएसपी ने प्रचंड सरकार को समर्थन जारी रखने का फैसला किया है. प्रचंड सराकर को विश्वासमत जीतने के लिए संसद में सिर्फ 138 वोटों की जरूरत है.
बता दें कि सीपीएन-यूएमएल ने सरकार से समर्थन लेने के कारण बीते साल दिसंबर के आखिर में बनी मौजूदा सरकार ने अपना बहुमत खो दिया है. ऐसे में प्रचंड सरकार को संसद में शक्ति परीक्षण का सामना करना पड़ेगा और एक महीने के भीतर विश्वास मत हासिल करना होगा.

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