
नीतीश की घटी बारगेन पावर, बीजेपी अब बड़ा भाई... बिहार NDA के सीट शेयरिंग फॉर्मूले के 5 बड़े संदेश
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एनडीए में बिहार का सीट शेयरिंग फॉर्मूला भले ही लोकसभा चुनाव के लिए है, इसमें भविष्य की सियासत के भी बड़े संकेत छिपे हैं. एनडीए की सीट शेयरिंग फॉर्मूले से बीजेपी ने कौन से संदेश दिए हैं?
बिहार में लोकसभा की 40 सीटें हैं और सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने पहले चरण की सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से पहले सीट शेयरिंग फॉर्मूले का ऐलान कर दिया है. एनडीए की सीट शेयरिंग में पशुपति पारस खाली हाथ रह गए हैं तो वहीं उपेंद्र कुशवाहा और जीतनराम मांझी की पार्टियों को एक-एक सीटें मिल सकी हैं. लोकसभा चुनाव के लिए एनडीए के इस सीट शेयरिंग फॉर्मूले में भविष्य की सियासत के लिहाज से बड़े संदेश भी छिपे हैं. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इस फॉर्मूले के जरिए कौन से बड़े संदेश दिए हैं?
फ्यूचर पॉलिटिक्स की बिसात
बिहार में बीजेपी न सिर्फ इस लोकसभा चुनाव बल्कि आगे के विधानसभा चुनाव की अलग बिसात भी साथ-साथ बिछाती जा रही है. नीतीश के साथ औऱ नीतीश से आगे भी कैसे बीजेपी अपने दम पर बिहार में तैयार हो? इस लिहाज से चिराग पासवान पर खुलकर दांव खेल दिया है. इसकी पहली झलक तब मिली जब ओबीसी समुदाय से आने वाले सम्राट चौधरी को बीजेपी ने नीतीश की नई सरकार में डिप्टी सीएम का पद दिया वहीं सवर्ण तबके में बैलेंस बनाने के लिए विजय सिन्हा को दूसरा डिप्टी सीएम बनाया.
बिहार में एनडीए का सीट शेयरिंग फॉर्मूला बिहार में बीजेपी की बदलती भूमिका का, बदलते तेवर का संकेत भी है. नीतीश कुमार के फिर से साथ आने, एनडीए सरकार में डिप्टी सीएम बनने के ठीक बाद बिहार बीजेपी के अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने साफ कहा था कि हमारा लक्ष्य बिहार में बीजेपी की सरकार है. लोकसभा चुनाव के सीट शेयरिंग फॉर्मूले में इसकी झलक भी दिख रही है.
बिहार में बीजेपी अब बड़ा भाई
बिहार की सियासत में अब तक जेडीयू ही एनडीए में बड़े भाई की भूमिका में रही है. 2009 के लोकसभा चुनाव में जेडीयू ने बिहार की 25 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 20 पर पार्टी जीती थी. बीजेपी ने तब 15 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और 12 जीती थीं. इससे पहले 2004 के चुनाव में जेडीयू ने 24 और बीजेपी ने 16 सीटों पर चुनाव लड़ा था. 2019 के चुनाव में दोनों दल फिर साथ आए और तब बीजेपी-जेडीयू ने बराबर-बराबर सीटों पर चुनाव लड़ा. बीजेपी इस बार 17 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी. नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) 16 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. दोनों ही दलों के बीच देखने में भले ही एक सीट का अंतर है लेकिन बीजेपी पहली बार बड़े भाई की भूमिका में आ चुकी है.

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