
धनबाद न्यायाधीश उत्तम आनंद को ऑटो चालक ने जान-बूझकर टक्कर मारी थी: सीबीआई
The Wire
धनबाद के अतिरिक्त ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद की मौत के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी न्यायिक अधिकारी की हत्या की गई है. इस घटना से न्यायिक अधिकारियों का मनोबल कम हुआ है और अगर इस मामले का जल्द से जल्द खुलासा नहीं किया गया तो यह न्यायिक व्यवस्था के लिए सही नहीं होगा.
रांची: धनबाद के न्यायाधीश उत्तम आनंद की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की जांच कर रहे केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने बीते बृहस्पतिवार को झारखंड हाईकोर्ट को बताया कि ऑटो चालक ने जान-बूझकर उन्हें (न्यायाधीश) टक्कर मारी थी, जिससे उनकी मौत हो गई थी.
हाईकोर्ट में उपस्थित हुए के सीबीआई के संयुक्त निदेशक शरद अग्रवाल ने अदालत को यह जानकारी दी और कहा कि इस घटना के पीछे षड्यंत्र की जांच जारी है.
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डॉ. रवि रंजन व जस्टिस एसएन प्रसाद की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है.
अदालत के आदेश पर सीबीआई के संयुक्त निदेशक बृहस्पतिवार को पीठ के समक्ष उपस्थित हुए. उन्होंने सुनवाई के दौरान कहा कि अब तक की जांच से पता चला है कि ऑटो चालक ने न्यायाधीश को जान-बूझकर टक्कर मारी थी और यह कोई हादसा नहीं था.

यह त्रासदी नवंबर 2014 में बिलासपुर ज़िले के नेमिचंद जैन अस्पताल (सकरी), गौरेला, पेंड्रा और मरवाही में आयोजित सरकारी सामूहिक नसबंदी शिविरों के दौरान हुई थी. ज़िला अदालत ने आरोपी सर्जन को ग़ैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया और दो साल की क़ैद, 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया. साथ ही पांच अन्य आरोपियों को बरी कर दिया.

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बीते 3 फरवरी को बजट सत्र के पहले चरण के दौरान लोकसभा द्वारा पारित एक प्रस्ताव के बाद अनुशासनहीन व्यवहार के लिए सात कांग्रेस सांसदों और एक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद को निलंबित कर दिया गया था. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें इन सदस्यों का निलंबन वापस लेने पर सहमति बनी.

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