
दो साल से ठप दिल्ली महिला आयोग को लेकर हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब तलब किया
The Wire
दिल्ली महिला आयोग की लंबे समय से निष्क्रियता को लेकर राष्ट्रीय जनता दल सांसद सुधाकर सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से जवाब तलब किया है. सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि डीसीडब्ल्यू में सदस्यों और अध्यक्ष के रिक्त पदों को न भरने का कोई कारण नहीं हो सकता.
नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार (18 फरवरी) को दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) के लंबे समय से निष्क्रिय होने और आयोग के अध्यक्ष समेत अन्य पदों की रिक्तियों को लेकर दिल्ली सरकार से जवाब तलब किया है.
बार एडं बेंच के मुताबिक, मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ ने महिला आयोग के लंबे समय से ठप्प रहने पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि डीसीडब्ल्यू महिलाओं की सुरक्षा और कानूनी अधिकारों से संबंधित महत्वपूर्ण कार्य करता है और आयोग में सदस्यों और अध्यक्ष के रिक्त पदों को न भरने का कोई कारण नहीं हो सकता.
अदालत राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी. याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए अधिवक्ता सत्यम ने बताया कि आयोग जनवरी 2024 से कार्य नहीं कर रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि डीसीडब्ल्यू कार्यालय बंद कर दिया गया है और कर्मचारियों को भी हटा दिया गया है.
गौरतलब है कि इससे पहले द वायर हिंदी ने दिसंबर 2025 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया था कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित आईटीओ के विकास भवन का दूसरा फ्लोर, जो कभी दिल्ली महिला आयोग के कार्यालय का पता हुआ करता था, लंबे समय से बंद पड़ा है. आयोग की आखिरी नियुक्त अध्यक्ष स्वाति मालिवाल थीं, जिन्होंने जनवरी 2024 को राज्यसभा जाने के लिए पद छोड़ा था.
आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, अध्यक्ष समेत इसके मेंबर सेक्रेटरी और अन्य पद खाली पड़े हैं. इसके अलावा मई 2024 में महिला एवं बाल विकास विभाग ने ‘अनुचित’ नियुक्ति का हवाला देते हुए आयोग में कार्यरत 223 संविदा कर्मचारियों को हटाने का आदेश दिया था.
फरवरी 2025 में भाजपा सरकार आने के बाद सीएम रेखा गुप्ता ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर तमाम दावे किए थे, उन्होंने दिल्ली महिला आयोग को जल्द सक्रिय करने की बात भी कही थी, लेकिन वह अब तक आयोग के दफ़्तर पर लगा ताला नहीं खुलवा सकी हैं.

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