
देश में ऑक्सीजन की किल्लत कैसे दूर कर पाएंगे PSA प्लांट? जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट
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एसोचैम के प्रेसिडेंट विनीत अग्रवाल ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में 5 प्रतिशत में भी ये प्लांट नही है. अगर ये सभी के पास होता और लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन बैक अप के लिए रखते तो आज ऑक्सीजन के अभाव में लोगों की मौत नही होती.
कोविड की दूसरी लहर में गंभीर रूप से बीमार और आइसोलेशन में रह रहे लोग सोशल मीडिया, व्हाट्सअप के जरिए ऑक्सीजन मांग रहे हैं. इसकी खपत भी ज्यादा बढ़ गई है. लेकिन सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं. हालात इतने चिंताजनक हो गए हैं कि अब सुप्रीम कोर्ट से लेकर हाई कोर्ट तक, सभी को मामले पर सुनवाई करनी पड़ रही है. लेकिन इस संकट के बीच कहा जा रहा है कि PSA प्लांट लगाने से देश की काफी हद तक ऑक्सीजन की किल्लत दूर हो सकती है. PSA प्लांट ऑक्सीजन किल्लत खत्म कर देंगे?
आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

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AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.









