
देवउठनी एकादशी पर क्यों पीटा जाता है सूप? जानें महत्व
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देवउठनी एकादशी के दिन ही भगवान विष्णु अपनी निद्रा से जागते हैं. इसके साथ ही मांगलिक कार्य भी शुरू हो जाते हैं. हर पर्व की तरह देवउठनी एकादशी पर भी कुछ खास परंपराएं निभाई जाती हैं. इस दिन लोग सूप पीटते हैं. आइए जानते हैं इसके पीछे की वजह और कहानी.
हर माह में आने वाली एकादशी महत्वपूर्ण मानी जाती है. लेकिन, सबसे बड़ी एकादशी देवउठनी एकादशी मानी जाती है. हिन्दू पंचांग के अनुसार, कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी को देवउठनी एकादशी मनाई जाती है. इसे देवोत्थान एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. देव विष्णु पुराण के अनुसार आषाढ़ की एकादशी को भगवान विष्णु ने शंखासुर नामक भयंकर राक्षस को मारा और फिर भारी थकान के बाद सो गए.
उसके चार महीने बाद कार्तिक शुक्ल एकादशी पर भगवान विष्णु श्री हरि योग निद्रा से जग जाते हैं और प्रकृति में आनंद की वर्षा होती है. इस बार देवउठनी एकादशी 04 नवंबर 2022 यानी आज के दिन मनाई जा रही है. इसका पारण 05 नवंबर शनिवार यानी कल किया जाएगा. साथ ही कल तुलसी विवाह का आयोजन भी मनाया जाएगा. देवउठनी एकादशी के दिन गन्ने और सूप को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है. आइए जानते हैं कि गन्ने और सूप पीटने का महत्व.
देवउठनी एकादशी के दिन गन्ने और सूप का महत्व
इस दिन सूप और गन्ने का खास महत्व होता है. एकादशी से ही किसान अपनी फसलों की कटाई करते हैं. कटाई से पहले गन्ने की विधिवत पूजा की जाती है और इसे विष्णु भगवान को चढ़ाया जाता है. भगवान विष्णु को अर्पित करने के बाद गन्ने को प्रसाद के रूप में बांटा जाता है.
मान्यता के अनुसार, इस दिन महिलाएं सूप पीटने का कार्य करती हैं. इससे घर में कामना आती है. साथ ही सूप पीटने से घर से गरीबी भागती है.
देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी विवाह का महत्व

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