
दुनिया के इन देशों ने कैसे संभाली आवारा कुत्तों की समस्या, इंडिया को इनसे भी सीख लेनी चाहिए
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मोरक्को के गृह मंत्री ने आवारा कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने के लिए 100 मिलियन डॉलर का बजट घोषित किया. इसके तहत 130 कम्यूनल हाइजीन ऑफिस खोले गए, जिनमें 60 डॉक्टर, 260 नर्स, 260 हेल्थ टेक्नीशियन और 130 वेटरिनेरियन नियुक्त किए गए, ताकि 1244 नगरपालिकाओं में शेल्टर मैनेज किए जा सकें.
दिल्ली-एनसीआर में कुत्तों को पकड़कर शेल्टर में रखने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भारत में डॉग बाइट्स को लेकर बहस तेज हो गई है. पीटीआई के सोर्स के अनुसार दिल्ली के आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि इस साल अकेले अब तक 26,334 डॉग बाइट के मामले दर्ज किए गए हैं.
जहां एक तरफ कई लोग कोर्ट के इस फैसले का समर्थन कर रहे हैं, वहीं एनिमल एक्टिविस्ट्स का कहना है कि यह आदेश संवेदनहीन है और सुप्रीम कोर्ट के पहले के फैसले की भावना के खिलाफ है. ऐसे में आइए जानते हैं कि दुनिया के अलग-अलग देशों ने कुत्तों के हमले और आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या से कैसे निपटा?
नीदरलैंड
यूरोप के इस देश ने एक व्यापक वेलफेयर-फर्स्ट रणनीति अपनाई. पेट स्टोर से पालतू खरीदने पर भारी टैक्स लगाया गया ताकि लोग शेल्टर से गोद लेने को प्रोत्साहित हों. सरकार ने CNVR प्रोग्राम (Collect, Neuter, Vaccinate, Return) शुरू किया, जिसमें आवारा कुत्तों की मुफ्त नसबंदी और टीकाकरण किया जाता है. कड़े एंटी-क्रुएल्टी कानून और भारी जुर्माने लागू किए गए. साथ ही रेस्क्यू और कानून लागू करने के लिए समर्पित एनिमल वेलफेयर यूनिट बनाई गई. देशव्यापी गोद लेने के अभियान और पब्लिक अवेयरनेस से जिम्मेदार पेट ओनरशिप को बढ़ावा दिया गया.
मोरक्को

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