
दिल्ली शराब नीति घोटाला: LG को रिपोर्ट, सरकारी गवाह और सिसोदिया-संजय की गिरफ्तारी, 15 महीने की जांच में कब क्या-क्या हुआ?
AajTak
दिल्ली के शराब घोटाला मामले की दो-दो केंद्रीय एजेंसियां जांच कर रही हैं. शुरुआत में उपराज्यपाल ने इस केस को जांच के लिए सीबीआई के पास ट्रांसफर किया था. बाद में वित्तीय गड़बड़ी सामने आने पर प्रवर्तन निदेशालय की भी एंट्री हुई. दोनों एजेंसियों ने इस पूरे मामले में बड़े दावे किए हैं. सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में मनीष सिसोदिया को आरोपी बनाया है. ईडी की जांच में इस केस की आंच संजय सिंह तक पहुंच गई.
आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह को बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गिरफ्तार कर लिया है. जांच एजेंसी ने दिल्ली एक्साइज पॉलिसी मामले की जांच के सिलसिले में एक्शन लिया है. ईडी इस केस में 15 महीने से जांच कर रही है. इससे पहले 26 फरवरी को सीबीआई ने दिल्ली के तत्कालीन डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार किया था. इस मामले में सीबीआई जहां पॉलिसी में गड़बड़ी और करप्शन को लेकर जांच कर रही है. वहीं ईडी मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से सच्चाई तक पहुंचने में जुटी है. हम आपको बताएंगे कि दिल्ली शराब घोटाले की 15 महीने की जांच में कब क्या-क्या हुआ?
डेढ़ साल के अंदर दिल्ली की सत्तारूढ़ पार्टी AAP से जुड़े तीसरे बड़े नेता की गिरफ्तारी से सियासत भी गरमा गई है. AAP और बीजेपी आमने-सामने हैं. गुरुवार को AAP कार्यकर्ता गिरफ्तारी का विरोध करेंगे. इससे पहले ईडी ने 30 मई, 2022 को एक अलग मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली के तत्कालीन मंत्री सत्येन्द्र जैन को गिरफ्तार किया था. बुधवार सुबह ईडी की टीम राज्यसभा सांसद संजय सिंह के नॉर्थ एवेन्यू स्थित सरकारी आवास पर पहुंची. यहां दिनभर की पूछताछ के बाद संजय को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया.
संजय को आज कोर्ट में पेश किया जाएगा
संजय को गुरुवार को दिल्ली की स्थानीय अदालत में पेश किए जाएगा, जहां ईडी संजय को कस्टडी में दिए जाने की मांग करेगी. गिरफ्तारी से पहले संजय ने एक वीडियो संदेश रिकॉर्ड किया. इसमें उन्होंने कहा, ईडी बिना किसी सबूत के मुझे जबरन गिरफ्तार कर रही है. मुझे मरना स्वीकार है लेकिन झुकना नहीं.
'मैं केजरीवाल का सिपाही, पीछे नहीं हटूंगा'
संजय ने आगे कहा, मैंने अडानी के घोटालों का खुलासा किया और ईडी के पास कई शिकायतें दर्ज कीं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई. मोदी जी 2024 का चुनाव बुरी तरह हार रहे हैं. वे अत्याचार करके और लोगों को जेल में डालकर नहीं जीत सकते. हम अरविंद केजरीवाल के सिपाही हैं. अत्याचार के सामने पीछे नहीं हटेंगे.

झारखंड के लातेहार जिले के भैंसादोन गांव में ग्रामीणों ने एलएलसी कंपनी के अधिकारियों और कर्मियों को बंधक बना लिया. ग्रामीणों का आरोप था कि कंपनी बिना ग्राम सभा की अनुमति गांव में आकर लोगों को ठगने और जमीन हड़पने की कोशिश कर रही थी. पुलिस के हस्तक्षेप के बाद लगभग दो घंटे में अधिकारी सुरक्षित गांव से बाहर निकल सके.

दिल्ली के सदर बाजार में गोरखीमल धनपत राय की दुकान की रस्सी आज़ादी के बाद से ध्वजारोहण में निरंतर उपयोग की जाती है. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के बाद यह रस्सी नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाने लगी. इस रस्सी को सेना पूरी सम्मान के साथ लेने आती है, जो इसकी ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्ता को दर्शाता है. सदर बाजार की यह रस्सी भारत के स्वाधीनता संग्राम और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनी हुई है. देखिए रिपोर्ट.

संभल में दंगा मामले के बाद सीजेएम के तबादले को लेकर विवाद शुरू हो गया है. पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए गए थे लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की. इस पर सीजेएम का अचानक तबादला हुआ और वकील प्रदर्शन कर रहे हैं. समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और AIMIM ने न्यायपालिका पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है. इस विवाद में राजनीतिक सियासत भी जुड़ी है. हाई कोर्ट के आदेशानुसार जजों के ट्रांसफर होते हैं लेकिन इस बार बहस हुई कि क्या यहां राज्य सरकार ने हस्तक्षेप किया.

दावोस में भारत वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का सामना करने और एक बेहतर भविष्य बनाने के लिए पूरी तैयारी कर रहा है. इस संदर्भ में सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव से खास बातचीत की गई जिसमें उन्होंने बताया कि AI को लेकर भारत की क्या योजना और दृष्टिकोण है. भारत ने तकनीकी विकास तथा नवाचार में तेजी लाई है ताकि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे रह सके. देखिए.

महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों के बाद ठाणे जिले के मुंब्रा क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. एमआईएम के टिकट पर साढ़े पांच हजार से अधिक वोट के अंतर से जीत हासिल करने वाली सहर शेख एक बयान की वजह से चर्चा में हैं. जैसे ही उनका बयान विवादास्पद हुआ, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका बयान धार्मिक राजनीति से जुड़ा नहीं था. सहर शेख ने यह भी कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है और वे उस तरह की राजनीति का समर्थन नहीं करतीं.








