
दिल्ली में दिवाली से पहले शराब बिक्री के टूटे सारे रिकॉर्ड, 15 दिन में ₹447.62 करोड़ की दारू पी गए लोग
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दिवाली 31 अक्टूबर को मनाई गई और उस दिन 'ड्राई डे' था यानी उस दिन शहर भर में सभी शराब की दुकानें बंद थीं. आंकड़ों के मुताबिक, 30 अक्टूबर को दिवाली की पूर्व संध्या पर कुल 33.80 लाख बोतलें बेची गईं, जिससे 61.56 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ.
दिवाली से पहले के 15 दिन में राष्ट्रीय राजधानी में शराब की बिक्री ने एक नया रिकॉर्ड बना दिया. दिल्ली में 15 से 30 अक्टूबर के बीच शराब की 3.87 करोड़ से अधिक बोतलों की बिक्री हुई, जिससे आबकारी विभाग को 447.62 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ. आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि 15 अक्टूबर से 30 अक्टूबर तक, दिल्ली सरकार के चार निगमों द्वारा संचालित शराब की दुकानों से 3.87 करोड़ बोतलें बेची गईं, जिनमें 2.98 करोड़ बोतलें भारतीय निर्मित विदेशी शराब (IMFL) और 89.48 लाख बीयर की बोतलें शामिल थीं.
दिवाली 31 अक्टूबर को मनाई गई और उस दिन 'ड्राई डे' था यानी उस दिन शहर भर में सभी शराब की दुकानें बंद थीं. आंकड़ों के मुताबिक, 30 अक्टूबर को दिवाली की पूर्व संध्या पर कुल 33.80 लाख बोतलें बेची गईं, जिससे 61.56 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ. पिछले साल की तुलना में इस साल दिवाली से पहले के पखवाड़े में 1.18 करोड़ बोतलें ज्यादा बिकीं, जो 2023 में 2.69 करोड़ से बढ़कर इस बार 3.87 करोड़ हो गईं.
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दिल्ली के आबकारी विभाग ने चालू वित्तीय वर्ष की पहली छमाही (अप्रैल-अक्टूबर 2024) में 3,047 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है. अधिकारियों ने कहा कि 2023 की इसी अवधि की तुलना में लगभग यह 7 प्रतिशत की वृद्धि है, जब 2,849 करोड़ रुपये की शराब बेची गई थी. दिल्ली आबकारी विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अप्रैल से अक्टूबर 2024 के बीच वैट सहित कुल उत्पाद शुल्क राजस्व 4,495 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में 4,188 करोड़ रुपये था.
जुलाई 2022 में दिल्ली सरकार द्वारा नई उत्पाद शुल्क नीति को वापस लेने के बाद राष्ट्रीय राजधानी में रिटेल लिकर बिजनेस को झटका लगा. नई शराब नीति के तहत, प्राइवेट आपरेटर्स दिल्ली में शराब की दुकानें चला रहे थे. नई नीति के वापस लिए जाने के कारण शराब का व्यापार कई महीनों तक प्रभावित रहा. क्योंकि खुदरा बिक्री सरकारी निगमों को सौंपे जाने से पहले कोविड-19 महामारी के प्रभाव के कारण अर्थव्यवस्था मंदी का सामना कर रही थी.
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