
दिल्ली: बारिश की पानी से भरे प्लॉट में डूबने से दो लड़कों की मौत, अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज
AajTak
दिल्ली के रोहिणी इलाके में बारिश का पानी एक प्लॉट में भरने के बाद उसमें डूबने से दो लड़कों की मौत हो गई. अब पुलिस ने इस मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है और मामले की जांच में जुट गई है. इस घटना को लेकर डीडीए ने अपने बयान में कहा, यह दुखद और दर्दनाक है, हम अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं.
दिल्ली के रोहिणी इलाके में एक प्लॉट में बारिश का पानी भर जाने की वजह से उसमें डूबने से दो नाबालिग बच्चों की मौत हो गई. अब इस मामले में पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है.
न्यूज एजेंसी के मुताबिक अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली पुलिस ने रोहिणी के प्रेम नगर में बारिश के पानी से भरे एक खाली सरकारी भूखंड में दो नाबालिगों के डूबने के मामले में ये केस दर्ज किया है.
बता दें कि दिल्ली में शुक्रवार शाम की बारिश के बाद प्रेम नगर के रानी खेड़ा गांव में खाली प्लॉट में जमा बारिश के पानी में 17 साल के दो नाबालिग लड़के मयंक और दिव्यांश डूब गए थे.
पुलिस ने कहा कि लड़के नहाने गए थे लेकिन परिवार के सदस्यों ने कहा कि वे प्लॉट पर क्रिकेट खेलने गए थे. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि शुरुआती तौर पर ऐसा लगता है कि दोनों लड़के पानी में नहाने गये थे. उन्होंने बताया कि परिजनों की शिकायत पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है.
पीड़ित के परिवार के सदस्यों और अन्य निवासियों ने कहा कि यह प्लॉट पिछले कई सालों से खाली था और बारिश के दौरान अक्सर इसके कई हिस्सों में पानी भर जाता था. एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा, 'यह हमेशा की समस्या है, जो हर साल मानसून के मौसम में होती है. जल जमाव के संबंध में अधिकारियों को कई शिकायतें दी गई हैं, लेकिन कभी कुछ नहीं किया गया.'
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की जमीन थी जो कई साल पहले दिल्ली राज्य औद्योगिक और बुनियादी ढांचा विकास निगम (डीएसआईआईडीसी) को दी गई थी.

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार और ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद आमने सामने हैं. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सीधे सीधे योगी आदित्यनाथ को चुनौती दे रहे हैं तो प्रशासन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से पूछ रहा है कि बताएं वो शंकराचार्य कैसे हैं. लेकिन बात अब इससे भी आगे बढ़ गई है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के विरोधी उन्हें स्वयंभू शंकराचार्य बता रेह हैं.

227 सदस्यीय BMC में बहुमत के लिए 114 सीटों की जरूरत होती है. महायुति ने 118 वार्ड जीतकर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है. इसके बावजूद मेयर पद को लेकर सहमति नहीं बन पाई है. स्थिति तब और नाटकीय हो गई, जब शिंदे ने कथित खरीद-फरोख्त की आशंका के चलते नवनिर्वाचित 29 शिवसेना पार्षदों को सप्ताहांत में एक फाइव-स्टार होटल में ठहरा दिया.

नोएडा केवल उत्तर प्रदेश का शो विंडो नहीं है, बल्कि प्रति व्यक्ति आय, प्रति व्यक्ति कंज्यूमर शॉपिंग, प्रति व्यक्ति इनकम टैक्स, प्रति व्यक्ति जीएसटी वसूली आदि में यह शहर देश के चुनिंदा टॉप शहरों में से एक है. पर एक शहरी की जिंदगी की सुरक्षा की गारंटी नहीं देता है. बल्कि जब उसकी जान जा रही हो तो सड़क के किनारे मूकदर्शक बना देखता रहता है.

उत्तर प्रदेश की सरकार और ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच चल रहे विवाद में नई उर्जा आई है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने खुली चुनौती के साथ योगी आदित्यनाथ को उनके शंकराचार्य होने पर सवाल उठाए हैं. इस मुद्दे ने राजनीति में तेजी से हलचल मचा दी है जहां विपक्ष शंकराचार्य के समर्थन में खड़ा है जबकि भाजपा चुप्पी साधे हुए है. दूसरी ओर, शंकराचार्य के विरोधी भी सक्रिय हुए हैं और वे दावा कर रहे हैं कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ही सच्चे स्वयंभू शंकराचार्य हैं.

उत्तर प्रदेश की सियासत में उल्टी गंगा बहने लगी है. मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान को लेकर हुआ विवाद अब बड़ा मुद्दा बन गया है. जहां खुद अविमुक्तेश्वरानंद के तेवर सरकार पर तल्ख हैं, तो वहीं बीजेपी पर शंकराचार्य के अपमान को लेकर समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज में संगम नोज तक पालकी पर जाकर स्नान करने से उन्हें रोका था.

झारखंड के लातेहार जिले के भैंसादोन गांव में ग्रामीणों ने एलएलसी कंपनी के अधिकारियों और कर्मियों को बंधक बना लिया. ग्रामीणों का आरोप था कि कंपनी बिना ग्राम सभा की अनुमति गांव में आकर लोगों को ठगने और जमीन हड़पने की कोशिश कर रही थी. पुलिस के हस्तक्षेप के बाद लगभग दो घंटे में अधिकारी सुरक्षित गांव से बाहर निकल सके.







