
दिग्विजय सिंह और कमलनाथ: कैसे 70 साल की उम्र के दो नेताओं के दम पर MP में सत्ता में वापसी की राह देख रही कांग्रेस?
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मध्यप्रदेश में इस साल के आखिरी में विधानसभा चुनाव होने हैं. बीजेपी और कांग्रेस दोनों पूरे दमखम के साथ मैदान में हैं. 2020 में सिंधिया की बगावत के चलते राज्य की सत्ता गंवाने वाली कांग्रेस इस बार कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के भरोसे सत्ता में वापसी की राह तलाश रही है. दोनों नेता ही गांधी परिवार के करीबी हैं.
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी अपनी सत्ता को बरकरार रखने की जंग लड़ रही है तो कांग्रेस वापसी के लिए बेताब है. इसके लिए कांग्रेस ने कमलनाथ के चेहरे को आगे कर रखा है तो दिग्विजय सिंह पर्दे के पीछे रहकर सियासी तानाबाना बुन रहे हैं. कांग्रेस की रणनीति का यह हिस्सा माना जा रहा है, क्योंकि एमपी का राजनीतिक मिजाज हिंदुत्व के रंग में चढ़ा हुआ है. यही वजह है कि कमलनाथ फ्रंटफुट पर तो दिग्विजय बैक डोर से बीजेपी को सत्ता से बेदखल करने का खेल खेल रहे हैं?
पांच साल पहले मध्य प्रदेश में 2018 विधानसभा चुनाव को 2 महीने से भी कम समय बचा था, तब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह कैमरे पर एक बात कहते हुए नजर आए थे. उन्होंने कहा था कि वो चुनावों में प्रचार करना बंद कर चुके हैं, क्योंकि उनके भाषणों का असर कांग्रेस पार्टी को मिलने वाले वोटों पर पड़ता है.
दिग्विजय के इस बयान ने सत्ता पर काबिज बीजेपी के लिए चारे का काम किया. बीजेपी ने दिग्विजय का मजाक उड़ाते हुए दावा किया कि सबसे पुरानी पार्टी ने वोट डाले जाने से पहले ही अपने हाथ खड़े कर दिए. दिग्विजय ने पूरे चुनाव अभियान में खुद को लो प्रोफाइल रखा था. नतीजों में कांग्रेस को बहुमत से 2 सीटें कम मिली थीं और 15 साल के बाद मध्य प्रदेश की सत्ता में कांग्रेस वापसी करने में कामयाब रही थी.
पिछले हफ्ते कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व सीएम कमलनाथ ने भी एक बयान दिया. उन्होंने कहा कि 1 मई 2018 को उनके प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने से पहले ज्यादातर लोग उन्हें नहीं जानते थे, लेकिन अब स्थिति बदल गई है.
मई 2018 तक कमलनाथ मध्य प्रदेश में करीब चार दशक बिता चुके थे. इन 40 सालों में ज्यादातर समय वह छिंदवाड़ा लोकसभा सीट से सांसद रहे. 2018 का चुनाव जीतकर वह मुख्यमंत्री बन गए, लेकिन उनका कार्यकाल सिर्फ 15 महीने ही चल पाया. कमलनाथ के बयान पर बीजेपी ने तंज कसा. पार्टी ने कहा कि मध्य प्रदेश में पहले उन्हें कोई नहीं जानता था, क्योंकि उन्होंने उनके (लोगों) लिए कुछ नहीं किया.
बता दें कि कमलनाथ और दिग्विजय सिंह दोनों ही मध्य प्रदेश में कांग्रेस के धुरी बने हुए हैं, लेकिन दोनों ही उम्र में लगभग बराबर हैं. 76 साल के दोनों कांग्रेस नेता अपनी स्पष्टवादिता के लिए जाने जाते हैं. दोनों ही राज्य के दूसरे नेताओं पर भारी पड़ते हैं. दोनों का गांधी परिवार के साथ अच्छा तालमेल है. पिछले साल जब कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष का चुनाव होना था, तब मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम सामने आने से पहले तक दोनों नेताओं के नाम इस रेस में लिया जाता है, लेकिन पुराने सियासी योद्धाओं के बीच समानताएं यहीं खत्म नहीं होती हैं.

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