
तिहाड़ जेल में क्रिकेट बैट से किया था कैदी का मर्डर, तीन साल बाद 4 विचाराधीन कैदी दोषी करार
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तिहाड़ जेल में बंद चार कैदियों ने क्रिकेट बैट से अचानक श्रीकांत राम स्वामी पर हमला कर दिया था. उस हमले में वो बुरी तरह से जख्मी हो गया था. बाद में उसे सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था. लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी.
दिल्ली की एक विशेष अदालत ने शुक्रवार को एक साथी कैदी की हत्या के मामले में तिहाड़ जेल के चार विचाराधीन कैदियों को दोषी ठहराया है. तीन साल पुराने कत्ल के इस मामले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) कर रही थी. उस वक्त जेल में हत्या का यह मामला काफी चर्चाओं में आ गया था.
हत्या और डकैती जैसे मामलों का आरोपी था श्रीकांत जेल में मारे गए उस कैदी का नाम श्रीकांत राम स्वामी था. वह तिहाड़ की जेल नंबर 2 के बैरक नंबर 4 में बंद था. श्रीकांत एक विचाराधीन कैदी था, जिसके खिलाफ हत्या और डकैती जैसे कई संगीन मामले चल रहे थे.
14 मई 2021, तिहाड़ जेल यही वो तारीख थी, जब उसी जेल में बंद चार कैदियों ने क्रिकेट बैट से अचानक श्रीकांत राम स्वामी पर हमला कर दिया था. उस हमले में वो बुरी तरह से जख्मी हो गया था. बाद में उसे सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था. लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी. सीबीआई अधिकारियों के मुताबिक, वारदात के दिन जेल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे खराब थे और घटना की कोई रिकॉर्डिंग नहीं हो पाई थी.
चार कैदी दोषी करार सीबीआई के प्रवक्ता ने इस मामले में जानकारी देते हुए पीटीआई को बताया कि प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, आरएडीसी, दिल्ली ने शुक्रवार को कैदी श्रीकांत राम स्वामी की हत्या से संबंधित मामले में चार विचाराधीन कैदियों किशन श्रेष्ठ, गणपत उर्फ कुणाल, आकाश उर्फ हन्नी और अरुण उर्फ मांडवा को दोषी करार दिया है.
हाई कोर्ट के आदेश पर मिली थी CBI को जांच सीबीआई के अधिकारियों ने एक बयान में कहा कि 11 जुलाई 2023 को आरोप तय होने के 10 महीने के भीतर दोषसिद्धि हो जाती है. आपको बता दें कि दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश पर सीबीआई ने इस मामले की जांच अपने हाथ में ली थी.
पांच महीने में दाखिल की थी चार्जशीट इससे पहले श्रीकांत राम स्वामी की बहन ने सीबीआई जांच की मांग करते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था. सीबीआई ने जांच अपने हाथ में लेने के पांच महीने के भीतर 22 दिसंबर, 2021 को इस मामले में आरोप पत्र दायर कर दिया था.

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