
ढाई दशक बाद कानपुर के बिकरू में प्रधान के दस दावेदार
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कानपुर में शिवराजपुर ब्लॉक की बिकरू ग्राम पंचायत पिछले वर्ष उस वक्त चर्चा में आई थी जब यहां के रहने वाले विकास दुबे ने 2 जुलाई की रात अपने गुर्गों के साथ मिलकर आठ पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी. 25 साल बाद यहां नहीं होगा निर्विरोध निर्वाचन.
कानपुर में शिवराजपुर ब्लॉक की बिकरू ग्राम पंचायत पिछले वर्ष उस वक्त चर्चा में आई थी जब यहां के रहने वाले विकास दुबे ने 2 जुलाई की रात अपने गुर्गों के साथ मिलकर आठ पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी. बिकरू कांड के बाद यूपी एसटीएफ ने स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर विकास दुबे समेत 6 बदमाशों को मार गिराया था. विकास दुबे का बिकरू समेत आस-पास के दर्जनों गांवों में दबदबा था. विकास दुबे ने दहशत, दौलत और दलबल की बदौलत बिकरू गांव में अपनी बादशाहत स्थापित की थी. कुख्यात अपराधी विकास ने 25 साल तक अपनी कोठी की चौखट से लोकतंत्र को बांध कर रखा था. विकास की मौत के बाद यहां पर हो रहे पंचायत चुनाव में लोकतंत्र की बयार बहती दिखाई दे रही है. पंचायत चुनाव 2021 की आरक्षण लिस्ट में बिकरू गांव सीट दलित के खाते में गई है. बिकरू ग्राम पंचायत में प्रधान के लिए 10 उम्मीदवारों ने नामांकन किया है. इससे पहले विकास दुबे की दहशत के कारण कोई भी प्रधान पद के लिए खड़ा नहीं होता था. पंचायत चुनाव में विकास दुबे जिसे चाहता था उसे ही प्रधान पद के लिए निर्विरोध चुनाव जिताता था. दुर्दांत अपराधी विकास दुबे 1995 में पहली बार ग्राम प्रधान चुना गया था. चुनाव जीतने के बाद लोकतंत्र की चाभी उसके हाथ लग गई. वर्ष 2000 में अनुसूचित जाति की सीट होने पर विकास ने गांव की गायत्री देवी को प्रत्याशी बनाया था. गायत्री देवी निर्विरोध चुनाव जीत कर प्रधान बन गईं. वर्ष 2005 में बिकरू ग्राम पंचायत की सीट सामान्य होने पर विकास के छोटे भाई दीपक की पत्नी अंजली दुबे को निर्विरोध प्रधान चुना गया. 2010 में सीट पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित होने पर विकास ने रजनीश कुशवाहा को मैदान में उतारा था. रजनीश कुशवाहा निर्विरोध ग्राम प्रधान चुने गए. 2015 में अंजली दुबे दोबारा निर्विरोध ग्राम प्रधान चुनी गई थीं. बिकरू गांव के रहने वाले बताते हैं कि प्रधान कोई भी बने लेकिन उसकी चाभी विकास के हाथों में रहती थी.
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