
दिनभर ई-रिक्शा चलाकर कितनी होती है कमाई? जवाब सुनते ही हैरान रह गया शख्स, Video वायरल
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सड़क पर दौड़ते ई-रिक्शा हर शहर की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं. हर कुछ कदम पर ये नजर भी आते हैं और सफर को आसान भी बनाते हैं. लेकिन इन्हें देखकर लोगों के मन में एक सवाल हमेशा घूमता रहता है-एक ई-रिक्शा चालक पूरे दिन में कितनी कमाई कर लेता होगा.
भारत में ई-रिक्शा का सफर किसी क्रांति से कम नहीं रहा है. शुरुआत में इन वाहनों को केवल कुछ किलोमीटर की दूरी पर पांच यात्रियों को ले जाने के लिए लाया गया था. लेकिन समय के साथ, ई-रिक्शा शहरों की लाइफलाइन बन गए. दिल्ली, नोएडा, जयपुर, लखनऊ कौन-सा ऐसा बड़ा शहर है जहां ये दिखते न हों? सिर्फ सफर का जरिया नहीं, ये लाखों लोगों की आजीविका भी बन चुके हैं.
यही वजह है कि लोगों के मन में अक्सर एक सवाल उठता है ई-रिक्शा चलाने वाले आखिर दिन में कितना कमा लेते हैं? इसी जिज्ञासा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो को रातों-रात वायरल बना दिया.
इंस्टाग्राम पर कंटेंट क्रिएटर जलज हसीजा ने सड़क पर खड़े एक ई-रिक्शा चालक से बातचीत करते हुए एक वीडियो पोस्ट किया. उनके चैनल पर पहले भी ऐसे कई इनसाइटफुल कंटेंट आते रहे हैं, लेकिन यह वीडियो कुछ घंटों में ही मिलियन्स में पहुंच गया. वायरल होने की वजह ये है कि लोग दूसरों की कमाई जानने में हमेशा दिलचस्पी रखते हैं.
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वीडियो में जलज रिक्शा चालक से पूछते हैं-भैया, दिन में कितनी सवारी हो जाती है? ड्राइवर पहले थोड़ा झिझकता है, फिर कहता है लगभग 200 मान लीजिए.यही जवाब वीडियो की असली शुरुआत बन गया.जलज जैसे ही संख्या सुनते हैं, तुरंत हिसाब लगाने लगते हैं. उनके मुताबिक अगर रोज लगभग 200 सवारियां मिल जाएँ और औसतन हर सवारी से 10 रुपये मिलें, तो दिन की कमाई करीब 2000 रुपये बनती है. इसमें से ई-रिक्शा चालक रोजाना चार्जिंग और पार्किंग पर लगभग 130 रुपये खर्च करता है. खर्च घटाकर देखें तो उसकी नेट बचत करीब 1800 रुपये प्रतिदिन बैठती है. जब इसी रकम को महीने के आधार पर जोड़ा गया, तो कुल कमाई लगभग 54,000 रुपये निकलती है.
देखें वायरल वीडियो

आज पूरी दुनिया LNG पर निर्भर है. खासकर भारत जैसे देश, जहां घरेलू गैस प्रोडक्शन कम है, वहां LNG आयात बेहद जरूरी है. लेकिन जैसे ही युद्ध या हमला होता है, सप्लाई चेन टूट जाती है और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं. कतर जैसे देशों से निकलकर हजारों किलोमीटर दूर पहुंचने तक यह गैस कई तकनीकी प्रोसेस और जोखिम भरे रास्तों से गुजरती है.












