
ट्रंप को लगा उन्हीं के टैरिफ का डंक... इस साल 6 देशों ने रद्द की F-35 फाइटर जेट डील
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ट्रंप के ऊंचे टैरिफ से अमेरिका का F-35 प्रोग्राम बुरी तरह प्रभावित हो रहा है. 2025 में पुर्तगाल, स्पेन ने सौदे रद्द किए. भारत ने F-35 खारिज किया. स्विट्जरलैंड-कनाडा रिव्यू कर रहे हैं. 150+ जेट रद्द किए गए हैं. अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है. अमेरिका फर्स्ट नीति अमेरिका के अपने हथियार प्रोग्राम पर उल्टी पड़ रही है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट नीति का मतलब है कि अमेरिका को पहले रखना. इसके तहत उन्होंने विदेशी सामान पर बहुत ऊंचे टैरिफ लगा दिए हैं. लेकिन यह नीति अमेरिका के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमान F-35 के प्रोग्राम पर भारी पड़ रही है. 2025 में कई देशों ने F-35 खरीदने के सौदे रद्द कर दिए या रोक दिए. इससे लॉकहीड मार्टिन कंपनी को अरबों डॉलर का नुकसान हो रहा है. अमेरिकी नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है.
F-35 लाइटनिंग II दुनिया का सबसे उन्नत स्टील्थ लड़ाकू विमान है. यह लॉकहीड मार्टिन कंपनी बनाती है. अमेरिकी सेना के अलावा 20 से ज्यादा देश इसे इस्तेमाल करते हैं. यह विमान दुश्मन के रडार से बच सकता है. हवा, जमीन व समुद्र पर हमला कर सकता है. लेकिन इसकी कीमत बहुत ऊंची है – हर जेट की लागत 80-100 मिलियन डॉलर. बड़े सौदे होने से कीमत कम रहती है. अगर विदेशी देश न खरीदें तो अमेरिका को ही ज्यादा महंगा पड़ता है.
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ट्रंप ने 2025 में विदेशी सामान पर 10% से 50% तक टैरिफ लगा दिए. यह रेसिप्रोकल टैरिफ कहलाता है – मतलब जो देश अमेरिकी सामान पर टैक्स लगाते हैं, उन पर भी वैसा ही. अप्रैल 2025 तक औसत टैरिफ 27% हो गया, जो 100 साल का रिकॉर्ड है. ट्रंप का कहना है कि इससे अमेरिकी नौकरियां बचेंगी. लेकिन F-35 के पार्ट्स दुनिया भर से आते हैं. टैरिफ से कीमत बढ़ गई, जिससे कई सहयोगी देश नाराज हो गए. वे अब यूरोपीय विमान जैसे राफेल, यूरोफाइटर या ग्रिपेन चुन रहे हैं. इससे F-35 का निर्यात संकट गहरा गया है.
ट्रंप ने नवंबर 2025 में सऊदी अरब को F-35 बेचने की मंजूरी दी. यह नया ग्राहक है, लेकिन कांग्रेस की मंजूरी चाहिए. इज़रायल बहुत नाराज़ है क्योंकि F-35 की ताकत इज़रायल के पास थी. सऊदी-अमेरिका रिश्ते सुधारने के लिए यह कदम है, लेकिन अभी सौदा पक्का नहीं.

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