
टीचर के ट्रांसफर पर फूट-फूटकर रोए स्टूडेंट्स, पैरेंट्स भी हुए भावुक, देखें Video
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नवादा के एक स्कूल में करीब 12 साल बाद टीचर डॉ विनीता प्रिया के ट्रांसफर पर स्कूल के बच्चे फूट-फूटकर रोए. कोई उनके गले से लिपट कर रोया, तो कोई उन्हें विद्यालय से नहीं जाने की जिद पर रास्ता रोके खड़ा था. टीचर खुद भी अपने आंसू नहीं रोक पाई. यह देखकर बच्चों के पैरेंट्स की भी आंखें नम थीं.
कहते हैं काम के बदले सिर्फ पैसा नहीं प्यार भी मिलता है. ऐसा ही कुछ बिहार के एक सरकारी स्कूल की टीचर के साथ हुआ, जो स्कूल विदाई पर शिक्षकों के लिए प्रेरणस्त्रोत बना गया है. नवादा में सरकारी स्कूल में गुरु और शिष्य में अटूट प्रेम देखने को मिला. रजौली के राम लाल इंटर विद्यालय तारगीर की शिक्षिका डॉ. विनीता प्रिया की विदाई पर पूरा स्कूल रो पड़ा. बच्चे भी अपनी प्रिय मैम के गले लगकर फूट-फूटकर रोए. इस दौरान शिक्षिका भी अपने आंसू रोक नहीं पाई. कोई शिक्षिका के गले से लिपट कर बेजार होकर रो रही थी, तो कोई रास्ता रोके खड़ी थी.
पूरा मामला नवादा के रजौली का है, जहां करीब 12 साल बाद टीचर डॉ विनीता प्रिया की विदाई का ऐच्छिक स्थानांतरण जिले के रोह के इंटर विद्यालय ओहारी में हुआ है. जनवरी 2011 में सामाजिक विज्ञान विषय की शिक्षिका के रूप में योगदान देने वाली डॉ विनीता प्रिया कभी सोची भी नहीं होगी कि इस विद्यालय से जाना बच्चे ही नहीं उसके अभिभावकों को भी कितना खलेगा.
बुधवार को जब 12 साल बाद ऐच्छिक स्थानांतरण के बाद विद्यालय से डा. विनीता प्रिया विदा हो रही थी. उस समय कुछ देर के लिए मानो सबकी सांसे ठहर सी गई. स्कूली बच्चों को अपने प्रिय शिक्षिका का विद्यालय से जाना खूब खल रहा था. बच्चे कदम-कदम पर अपनी टीचर डा. विनीता प्रिया का रास्ता रोके खड़े थे. कोई उनके गले से लिपट कर रो रही थी, तो कोई उन्हें विद्यालय से नहीं जाने की जिद पर रास्ता रोके खड़ी थी. बच्चों के जिद के आगे शिक्षिका भी बेबस दिख रही थी. बच्चों को छोड़ कर जाना उन्हें भी खल रहा था. उनके आंखों से भी आंसू की धारा का प्रवाह रुकने का नाम नहीं ले रहा था.
विद्यालय के अन्य शिक्षक नौकरी में स्थानांतरण का हवाला देकर बच्चों को शिक्षिका का रास्ता छोड़ने की बात कहते रहे पर बच्चे कुछ भी मानने को तैयार नहीं थे. विद्यालय के बच्चे और विदा हो रही शिक्षिका की हालत ऐसी हो गई थी कि उन लोगो को देखकर शायद कोई ऐसा ही हो जिसकी आंखों से आंसू न निकला हो.
इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस शिक्षिका का विद्यालय के बच्चों से और बच्चों का शिक्षिका से कितना लगाव था. विद्यालय के बच्चों को रोते देख. वहां उपस्थित उनके अभिभावक की भी आंखें नम हो गईं. काफी समझाने और बार-बार विद्यालय आने के आश्वासन के बाद बच्चे शांत हुए और शिक्षिका डा. विनीता प्रिया को भारी मन से जाने दिया. इसके पूर्व विद्यालय परिवार द्वारा डॉ. विनीता प्रिया के सम्मान में विदाई समारोह का आयोजन किया गया. जिसमें उपस्थित शिक्षकों ने इनका विद्यालय से जाना विद्यालय के लिए अपूरणीय क्षति बताया. साथ ही कहा कि ऐसा शिक्षक विद्यालय को बार बार नहीं मिलता है.

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