
टारगेट पूरा नहीं हुआ तो खानी पड़ेंगी तीखी मिर्चियां और... चीन में कंपनी का अजीब नियम
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चीन की कुछ कंपनियों के अजीबोगरीब कायदे कानून इन दिनों वायरल हो रहे हैं. इनमें लोगों को टारगेट पूरा नहीं होने पर तीखी मिर्च खाने से लेकर, बॉस के स्वागत में जमीन पर लेटकर गाना गाने तक के लिए मजबूर किया जा रहा है.
हाल के हफ्तों में चीन की कुछ कंपनियों के दफ्तरों में लागू कठोर और अपमानजनक नियमों और रिवाजों के कुछ मामले सामने आए हैं. इनकी सोशल मीडिया पर कड़ी आलोचना हो रही है. दो अलग-अलग घटनाओं में कर्मचारियों को विचित्र और अमानवीय दंड देने के वीडियो सामने आने के बाद वहां की कार्य संस्कृति पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
ग्वांगझू स्थित एक कंपनी में काम करने वाले लोगों को अपने बॉस को असामान्य तरीके से अभिवादन करने को कहा जाता है. इसमें सामान्य तौर से 'गुड मॉर्निंग' या 'हैलो' कहने के बजाय, उन्हें जमीन पर लेटकर सम्मान (दंडवत प्रणाम) दिखाने को कहा गया. इसके अलावा, कर्मचारियों को बॉस और कंपनी की प्रशंसा करते हुए नारे लगाने के लिए मजबूर किया गया.
जमीन पर लेटकर बॉस की जयजयकार करते दिख रहे स्टाफ एक वायरल वीडियो में कर्मचारी एक स्वर में चिल्लाते नजर आ रहे हैं. इसमें सभी स्टाफ जमीन पर लेटकर नारे लगाते दिख रहे हैं. सभी कह रहे हैं - चीमिंग ब्रांच बॉस हुआंग का स्वागत करते है, चीमिंग ब्रांच में काम करते हुए हम जीवित रहे या हमारी मौत हो जाए अपने काम के दौरान कभी असफल नहीं होंगे.
वायरल वीडियो को बताया गया एडिटेड इस चरम वफादारी प्रदर्शन के वीडियो ने सोशल मीडिया पर लाखों लोगों का ध्यान आकर्षित किया और लोगों में आक्रोश पैदा कर दिया. कई लोगों ने इन प्रथाओं को अपमानजनक और अमानवीय बताया. हालांकि, कंपनी के कानूनी प्रतिनिधि, लियू ने वीडियो को फर्जी बताते हुए कहा कि यह फुटेज एडिटेड हो सकता है. उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी 2020 से बंद है और अब भंग होने की प्रक्रिया में है.
दंड स्वरूप तीखी मिर्च खाने को मजबूर करना एक अन्य घटना में, चेंगदू की एक वित्तीय फर्म के कर्मचारियों को लक्ष्यों को पूरा न कर पाने पर बेहद तीखी मिर्च, जिसे 'डेथ चिलीज़' कहा जाता है, खाने के लिए मजबूर किया गया. इस विचित्र दंड के कारण दो महिला कर्मचारियों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा.
डेथ चिलीज की प्रथा है पुरानी 'डेथ चिलीज़' जैसे दंड का उपयोग चीन में नया नहीं है. लेकिन एक बार फिर दफ्तरों में इस प्रथा के शुरू होने से कर्मचारियों की स्थिति की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित हुआ है. आलोचकों का कहना है कि यह क्रूर और असंवेदनशील तरीका कार्यस्थल की विषाक्त संस्कृति का प्रतीक है.

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