
जोधपुर से भी छोटे त्रिनिदाद एंड टोबैगो में रहते हैं 40% भारतीय, इंडियन मूल की ही हैं यहां की PM
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त्रिनिदाद एंड टोबैगो जो एक कैरेबियाई द्वीप देश है. इसका भारत से काफी पुराना और गहरा नाता रहा है. यहां करीब 40% भारतीय मूल के लोग रहते हैं. यहां की प्रधानमंत्री भी भारतीय मूल की है. आज भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस देश के दौरे पर जाएंगे. ऐसे में जानते हैं आखिर क्यों इतनी दूर बसा ये देश भारत के करीब है?
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आज घाना दौरा खत्म हो जाएगा. इसके बाद वो त्रिनिदाद एंड टोबैगो को जाएंगे. यह एक ऐसा देश है जहां एक बड़ी आबादी भारतीय मूल की है. यहां रहने वाले भारतीय मूल के लोगों का लंबा इतिहास है. इस देश के सांस्कृतिक और आर्थिक विकास में इंडियन आबादी बड़ी भूमिका है. त्रिनिदादी-भारतीय आज वहां एक सशक्त समुदाय है. त्रिनिदाद एंड टोबैगो की प्रधानमंत्री कमला प्रसाद बिसेसर भी भारतीय मूल की हैं.
मिनिस्ट्री ऑफ एक्सटर्नल अफेयर के आंकड़े के अनुसार त्रिनिदाद एंड टोबैगो में 556800 भारतीय मूल के लोग रहते हैं. इनमें से 1800 एनआरआई हैं और बाकी 555000 वहां के स्थायी निवासी हैं, जिनके पूर्वज सैकड़ों साल पहले भारत से जाकर वहां बस गए थे. जबकि पूरे देश की आबादी करीब 14 लाख है. ये देश भारत के जोधपुर से भी छोटा है. जहां जोधपुर 22 हजार 850 स्क्वायर किलोमीटर में फैला है. वहीं त्रिनिदाद एंड टोबैगो का क्षेत्रफल सिर्फ 5,128 वर्ग किलोमीटर है.
त्रिनिदाद एंड टोबैगो से जुड़ा है भारत का दो सदी पुराना इतिहास भारत और त्रिनिदाद एंड टोबैगो के बीच संबंधों का इतिहास 19वीं सदी से शुरू होता है. जब भारत से गिरमिटिया मजदूर के रूप में 1845 से 1917 के बीच लोग त्रिनिदाद एंड टोबैगो में जाकर बसने लगे. यही वजह है कि आज वहां की भाषा, भोजन, संगीत और धार्मिक प्रथाओं में भारतीय परंपराओं की मजबूत सांस्कृतिक उपस्थिति दिखती है.
उत्साह के साथ मनाए जाते हैं दिवाली और होली जैसे पर्व वहां दिवाली और होली को काफी उत्साह के साथ मनाया जाता है. वहां बसने वाली भारतीय मूल के लोग अब तक भारतीय संस्कृति को अपने रोजमर्रा की जिंदगी में उसी रूप में जीवित रखा है, जिसे दो सदी पहले उनके पूर्वज भारत से लेकर आए थे. भारतीय-त्रिनिदादी समुदाय अपनी पहचान के रूप में इसे संरक्षित करके रखा है.
कई वजहों से भारत के लोग जाते हैं त्रिनिदाद एंड टोबैगो भारतीय लोग कई कारणों से त्रिनिदाद और टोबैगो की यात्रा करते हैं. इनमें सांस्कृतिक आदान-प्रदान, पर्यटन, व्यापार के अवसर और देश में बड़ी संख्या में मौजूद भारतीय समुदाय से संपर्क शामिल हैं. वहीं त्रिनिदाद के कई लोग अपनी जड़ से जुड़ने और सैकड़ों साल पीछे छूट गए परिवार से मिलने के लिए भी भारत की यात्रा करते हैं.
वहां देखने को मिलती है भारतीय संस्कृति की झलक होली, दिवाली और अन्य पारंपरिक रीति-रिवाजों को यहां के भारतीय अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के रूप में अनुभव करते हैं. यही वजह है कि भारत से दूर इस देश में अपनी तरह की संस्कृति से रूबरू होने और इस कैरेबियाई द्वीप की खूबसूरती का दीदार करने यहां से कई लोग जाते हैं.

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