जानिए- क्यों खास हैं केरल के मैथ टीचर पी. विनोद कुमार, पाकिस्तान-श्रीलंका के छात्र भी हैं मुरीद
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एसोसिएट प्रोफेसर पी. विनोद कुमार एक मैथ्स टीचर हैं और बच्चों को सिर्फ कॉलेज में ही नहीं, बल्कि व्हॉट्सएप के जरिए भी पढ़ाते हैं. आजतक डिजिटल ने पी. विनोद कुमार से खास बातचीत की और उनसे जाना कि कैसे उन्होंने महज 16 लोगों के व्हॉट्सएप ग्रुप को आज लगभग 5,000 से ज्यादा लोगों को ग्रुप बना दिया.
हमारी जिंदगी में दो लोगों का बहुत महत्व होता है. पहले तो हैं हमारे माता-पिता और दूसरे हैं शिक्षक. एक प्रतिभाशाली गुरु समाज को होनहार पीढ़ी देता है. आज जब शिक्षण एक व्यवसाय बनता जा रहा है, ऐसे माहौल में केरल के शिक्षक पी.विनोद कुमार एक नजीर हैं जो अपना ज्ञान बेचने के बजाय मुफ्त प्रसारित कर रहे हैं. उनकी कक्षाएं पूरी तरह फ्री हैं, भले ही वो बड़ी बिल्डिंंग के सेटअप के बजाय अपने छात्रों को व्हाट्सएप-टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया के माध्यमों से पढ़ा रहे हैं. लेकिन, इसी सोशल मीडिया के जरिये वो अपनी शिक्षा की कला को विदेशों तक पहुंचा रहे हैं. आइए जानते हैं केरल के Associate professor पी. विनोद कुमार के बारे में.
व्हॉट्सएप पर पढ़ाई, न कोई दबाव-न कोई फीस एसोसिएट प्रोफेसर पी. विनोद कुमार एक मैथ्स टीचर हैं और बच्चों को सिर्फ कॉलेज में ही नही बल्कि व्हॉट्सएप के जरिए भी पढ़ाते हैं. इस व्हॉट्सएप ग्रुप की शुरुआत 2017 में हुई थी, जब उन्हें महसूस हुआ कि बच्चों को उनकी जरूरत है. अपनी 6 साल लंबी यात्रा के बारे में पी. विनोद कुमार बताते हैं कि वे किसी भी बच्चे से किसी तरह की फीस नहीं लेते हैं और न ही किसी पर भी किसी तरह का दबाव होता है. उनका कहना है कि जिन बच्चों को मैंने पढ़ाया है वे आज मेरे लिए एक रिसोर्स के रूप में साबित हो रहे हैं. कई बार मेरे पढ़ाए हुए बच्चे ही ऑनलाइन क्लासेस लेने आते हैं, लेकिन किसी पर ऐसा करने के लिए जोर नहीं डालता.
16 छात्रों हुई थी शुरुआत, आज 5 हजार के पार आजतक डिजिटल ने पी. विनोद कुमार से खास बातचीत की और उनसे जाना कि कैसे उन्होंने महज 16 लोगों के व्हॉट्सएप ग्रुप को आज लगभग 5,000 से ज्यादा लोगों को ग्रुप बना दिया. वे व्हॉट्सएप के ही जरिए बच्चों से सवाल लेते और उनके डाउट क्लियर करते. ऐसे करते-करते धीरे-धीरे ना सिर्फ उनके कॉलेज के बच्चों को इस ग्रुप का पता चला बल्कि आसपास के कॉलेजों के बच्चों को भी इस ग्रुप के बारे में पता चला और धीरे-धीरे वे इस ग्रुप से जुड़ते गए.
'कोरोना काल' ने बदली किस्मत! पी. विनोद कुमार बताते हैं कि पहले उन्होंने नहीं सोचा था कि आगे जाकर ये ग्रुप इतना बड़ा बन जाएगा. ये ग्रुप उन्होंने छोटे रूप में शुरू किया था. आगे वे बताते हैं कि साल 2020 में कोविड आया और सारी चीजें ऑनलाइन हो गईं तो उन्हें लगा कि बच्चे ऐसे समय में विषय में अपनी रुची खो देंगे. इसलिए उन्होंने गूगल फॉर्म के जरिए क्वेचन पेपर बनाए और उन्हें सभी बच्चों में शेयर किया और यही वो समय था जब बच्चों को सबसे ज्यादा इस ग्रुप के बारे पता चला और सिर्फ भारत से ही नहीं बल्कि पाकिस्तान और श्रीलंका से बच्चे जुड़ने लगे. इस ग्रुप का असर इतना हुआ ना सिर्फ वे परीक्षा में अच्छे अंक लाने लगे बल्कि कई बच्चों को IIT जैसे संस्थानों में एडमिशन सिर्फ इस व्हॉट्सएप ग्रुप के जरिए मिला.
पहला नेशनल वेबिनार और... पी. विनोद कुमार बताते हैं कि 2020 के टाइम पर ही हमने कई सारे वेबिनार आयोजित किए. साल 2020 की 15 अगस्त उनके लिए बहुत अच्छी साबित हुई क्योंकि 15 अगस्त, 2020 के दिन ही उन्होंने अपना पहला नेशनल वेबिनार आयोजित किया था. और अब तक वे ऐसे 8 नेशनल वेबिनर कंडक्ट कर चुके हैं जिसमें बड़े-बड़े इंस्टीट्यूट से प्रोफेसर लेक्चर लेने आते हैं और ये बच्चों के लिए बहुत अच्छे साबित हुए हैं.
इस समय पी. विनोद कुमार की क्लासेस के 6 अलग-अलग व्हॉट्सएप ग्रुप, 1 टेलिग्राम और 1 गूगल ग्रुप है जहां छात्र आसानी से जुड़ सकते हैं और आसानी से अपने डाउट क्लियर करवा सकते हैं. बता दें कि पी. विनोद कुमार अभी सिर्फ अंडरग्रेजुएट स्टूडेंट्स और पीएचडी स्कॉलर को ही पढ़ाते हैं. वे फिलहाल स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को नहीं पढ़ाते. आपको ये जानने में जरूर हैरानी होगी कि वे इस ग्रुप को चलाने वाले अकेले ही हैं. वे खुद ही इस सारे बच्चों से कनेक्ट करते हैं और जरूरत पड़ने पर उनकी काउंसलिंग भी करते हैं.

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