
जानिए कब शनिदेव व्यक्ति को बना देते हैं धनवान, रखें इन खास बातों का ध्यान
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Shani dev: ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, शनि सबसे धीमी गति से चलने वाला ग्रह है. जहां हर ग्रह ढाई महीने में या 45 दिन में अपनी चाल बदल लेता है. वहीं शनि ढाई वर्ष में अपनी चाल बदलते हैं. शनि जीवन में हर तरह के कर्मों का कारक और फलदाता होता है. शनि की महादशा 19 साल तक चलती है. नकारात्मक प्रभाव होने पर शनि लंबे समय तक कष्ट देते हैं.
Shani dev: सच्चे लोगों पर शनि हमेशा कृपा बरसाते हैं. अच्छे कर्म वाले लोगों पर भी शनि की कृपा हमेशा बनी रहती है. कहते हैं कि जीवन के शुभ और अशुभ कर्मों का हिसाब शनि ही रखते हैं. ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, शनि सबसे धीमी गति से चलने वाला ग्रह है. जहां हर ग्रह ढाई महीने में या 45 दिन में अपनी चाल बदल लेता है. वहीं शनि ढाई वर्ष में अपनी चाल बदलते हैं. वैदिक ज्योतिष के मुताबिक शनि न्यायाधीश देवता हैं. कुंडली में शनि की स्थिति से ही धन की स्थिति तय होती है. शनि के प्रभाव से व्यक्ति राजा से रंक हो जाता है. शनि को फल और कर्म दोनों का कारक माना जाता है.
शनि का धन की प्राप्ति से संबंध
शनि जीवन में हर तरह के कर्मों का कारक और फलदाता होता है. शनि की विशेष स्थितियों से धन की प्राप्ति सरल हो सकती है और मुश्किल भी हो सकती है. शनि की महादशा 19 साल तक चलती है. नकारात्मक प्रभाव होने पर शनि लंबे समय तक कष्ट देते हैं. शनि नकारात्मक हो तो साढेसाती या ढैया घोर दरिद्रता देती है. कुंडली में बेहतर योग होने के बावजूद अगर कर्म शुभ ना हो तो शनि धन की खूब हानि करवाता है.
शनि व्यक्ति को मालामाल बना सकते हैं. अच्छे कर्म करने पर धन वर्षा करते हैं शनिदेव. कहते हैं कि शनि जीवन में हर तरह के शुभ अशुभ हिसाब रखते हैं. मनुष्य के जीवन में कर्म बहुत ही महत्व रखते हैं जैसा कर्म वैसा ही जीवन. शनि की टेढ़ी नजर जिस भी व्यक्ति पर पड़ती है उस व्यक्ति का जीवन कष्टों से भर जाता है.
खास कामों से प्रसन्न होंगे शनि
1. साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें. 2. घर और मोहल्ले को गंदगी से दूर रखें.3. गरीबों को काले चने, काले तिल या उड़द, काले कपड़े दान करें. 4. धूप से बचने के लिए काले छातों का दान करें.5. कभी किसी जरूरतमंद का फायदा न उठाएं.6. किसी भी व्यक्ति का अहित न करें.7. पेड़ पौधों को नुकसान न पहुंचाएं.8. पीपल के वृक्ष का विशेष ध्यान रखें.9. शनिदेव के मंत्रों का जाप करें. मंत्र है- ऊं शं शनैश्चराय नम: .

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