
जयशंकर मॉस्को तो चाइनीज विदेश मंत्री दिल्ली में... ट्रंप के टैन्ट्रम के बीच इंडिया ने एक्टिवेट किया डिप्लोमेसी का रिसेट बटन
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से रूसी तेल का आयात पर गहरी आपत्ति जताई है. इसी का हवाला देते हुए ट्रंप ने भारत पर हैवी टैरिफ लगाए हैं. चीन पर भी ट्रंप ने भारी टैरिफ की घोषणा की है. इस माहौल में जयशंकर की चीन यात्रा और पुतिन की प्रस्तावित भारत यात्रा नई दिल्ली की कूटनीतिक पैंतरेबाजी का अहम हिस्सा है. चीन के विदेश मंत्री भी भारत आने वाले हैं.
अमेरिका की उम्मीद से परे टैरिफ नीतियों की वजह से जब नई दिल्ली और वाशिंगटन डीसी के रिश्तों में कड़वाहटआ गई है उस वक्त भारत भू-राजनीतिक जरूरतों के अनुसार रूस और चीन के साथ अपने संबंधों को और भी पक्का कर रहा है. अगले सप्ताह भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर मॉस्को जा रहे हैं. सूत्रों के अनुसार जयशंकर की ये यात्रा राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा के लिए जमीन तैयार करेगी.
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत से रूसी तेल का आयात कम करने को कहा है. इसी का हवाला देते हुए ट्रंप ने भारत पर हैवी टैरिफ लगाए हैं. इस माहौल में जयशंकर की चीन यात्रा और पुतिन की प्रस्तावित भारत यात्रा नई दिल्ली की कूटनीतिक पैंतरेबाजी का अहम हिस्सा है. गौरतलब है कि भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल पिछले ही हफ्ते रूस की यात्रा से वापस आ चुके हैं.
ट्रंप के मनमाने कदमों के बीच चीन के साथ एंगेजमेंट भारत की कूटनीतिक आउटरिच का अहम हिस्सा है. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 साल के लंबे अंतराल के बाद चीन जाने की घोषणा की है. उनकी ये घोषणा तब आई है जब भारत और चीन दोनों ही अमेरिकी टैरिफ वॉर से जूझते नजर आ रहे हैं. पीएम मोदी की चीन यात्रा से पहले विश्वास बहाली के तौर पर वहां के विदेश मंत्री वांग यी इसी हफ्ते भारत आ रहे हैं.
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि वांग 18 अगस्त को भारत आएंगे और वह एनएसए अजीत डोभाल के साथ बॉर्डर से जुड़े मुद्दों पर बात करेंगे. यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन की प्रस्तावित यात्रा से कुछ दिन पहले होगी. गौरतलब है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद ये किसी बड़े चीनी अधिकारी की पहली भारत यात्रा है. भारत ने कहा है कि इस ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान ने चीन के ड्रोन्स और हथियारों का इस्तेमाल किया.
इसके अलावा भारत ने यह भी कहा कि बीजिंग ने इस जंग के दौरान रावलपिंडी में बैठे पाकिस्तानी जनरलों को लाइव इनपुट मुहैया कराए. इस लिहाज से चीन के विदेश मंत्री की ये यात्रा अहम है और इन परिस्थितियों में पीएम मोदी की चीन यात्रा भारत की विदेश नीति का एक टर्निंग प्वाइंट है.
गौरतलब है कि अमेरिका से तनाव और यूरोपियन यूनियन की नाराजगी के बावजूद रूस से कच्चा तेल खरीद रहा भारत स्वयं को पश्चिम विरोधी समूह के तौर पर पेश नहीं करना चाहता है. भारत चाहता है कि इस कूटनीतिक खींचतान में उसकी छवि ऐसी रहे जो गैर-पश्चिम (Non-western) है न कि पश्चिम विरोधी (Anti-western). ऐसा करते हुए भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता कायम रखना चाहता है. यही वजह है कि भारत अपने कदम सावधानी से उठा रहा है.

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