
जब थाने में किसान बनकर पहुंचे थे PM, रिश्वत भी दी थी, पूरा थाना हो गया था सस्पेंड... चौधरी चरण का मशहूर किस्सा
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देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को हाल ही में केंद्र सरकार ने भारत रत्न से सम्मानित किया. किसानों के लिए हर वक्त खड़े रहने वाले चौधरी चरण सिंह के कई किस्से आज भी लोगों को याद हैं. वह अक्सर किसानों की समस्या सुनने और सरकारी दफ्तरों में भी मुआयना करने चले जाते थे.
देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को हाल ही में केंद्र सरकार ने देश के सर्वोच्च सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित किया. पश्चिमी यूपी से किसान नेता से लेकर देश के प्रधानमंत्री पद पर आसीन होने तक का चौधरी चरण सिंह का सियासी सफर बहुत दिलचस्प रहा है. उन्होंने 28 जुलाई, 1979 से 14 जनवरी, 1980 तक वह प्रधानमंत्री पद पर आसीन रहे. किसानों के लिए हर वक्त खड़े रहने वाले चौधरी चरण सिंह के कई किस्से आज भी लोगों को याद हैं. ऐसा ही एक किस्सा 25 साल पहले का है, जिसका जिक्र हम यहां कर रहे हैं.
जब किसान बनकर पहुंचे थे पुलिस थाने
साल 1979 की बात है जब शाम के वक्त एक परेशान किसान यूपी के इटावा जिले के उसराहार थाने में पहुंचा. किसान ने पहले इधर-उधर नजर दौड़ाई और फिर झिझकते हुए हड कांस्टेबल के पास पहुंच गया. इस दौरान हेड कांस्टेबल आराम फरमा रहा था और जैसे ही उसने नजर घुमाई तो सामने मैले-कुचैले कपड़े और धोती पहने एक किसान खड़ा था जिसके पैर में चप्पल भी नहीं थे. कांस्टेबल ने किसान से पूछा, “हाँ, क्या बात हो गई?”
इस पर किसान ने डरते और सकुचाते हुए हुए बताया कि वह मेरठ से अपने रिश्तेदार के यहां बैल खरीदने आया है लेकिन रास्ते में एक जेबकतरे ने उसकी जेब काट ली और पैसे चुरा लिये, इसलिए वह शिकायत लिखवाने के लिए पुलिस थाना में आया है. हेड कांस्टेबल ने नजरें टेढ़ी करते हुए पूछा, 'मेरठ से बैल खरीदने इतनी दूर क्यों आये भाई? क्या आपके पास इस बात का कोई सबूत है कि आपकी जेब काट ली गई है? हो सकता है कि आपके पैसे कहीं गिर गए हों या इसका कोई सबूत है कि किसी ने आपकी जेब काट ली हो, आपके पैसे कहीं गिर गए हों, या आपने पैसे खाने-पीने में उड़ा दिए हों और अब घरवाले के डर से चोरी करने का नाटक कर रहे हों?' अंत में कांस्टेबल ने कहा, 'जाओ शिकायत नहीं लिखी जाएगी.'
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मुंशी भी रह गया था हैरान

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