
जब जुबिन गर्ग की हत्या हुई तो कातिल कौन? असम से सिंगापुर तक जांच में क्या कड़ियां जुड़ीं अब तक
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असम के सुपरस्टार गायक जुबिन गर्ग की रहस्यमयी मौत अब हत्या में बदल चुकी है. SIT रिपोर्ट, यॉट के वीडियो, बैंडमेट्स के आरोप, वित्तीय विवाद और सात गिरफ्तारियों ने केस को उलझा दिया है. पढ़ें सिंगापुर से असम तक जुड़ी इस केस की हर कड़ी की कहानी.
Zubeen Garg Murder Case: असम के मशहूर गायक जुबिन गर्ग की मौत शुरू से ही मिस्ट्री बनी हुई है. शुरुआती दावे यह थे कि वो तैराकी के दौरान डूब गए, लेकिन परिवार और समर्थकों ने इसे हादसा मानने से इंकार कर दिया. बढ़ते सवालों और विरोध के बाद असम सरकार ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया. अब SIT ने अपनी रिपोर्ट में यह मान लिया है कि जुबिन की मौत हादसा नहीं बल्कि हत्या थी, जिसने पूरे देश को चौंका दिया है. आइए जानते हैं इस केस की पूरी कहानी.
हिमंता सरमा का बड़ा बयानअसम विधानसभा में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने खुलासा किया कि SIT की अंतरिम रिपोर्ट में हत्या के साफ संकेत मिले हैं. उन्होंने कहा कि जिन पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उन सभी पर हत्या की धारा लगाई गई है. सीएम ने यह भी बताया कि 8 दिसंबर तक मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी जाएगी. हालांकि, रिपोर्ट फिलहाल सार्वजनिक नहीं की जाएगी ताकि किसी तरह की गलतफहमी न फैले.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट और नए सवाल जुबिन का पोस्टमार्टम सिंगापुर में भी हुआ और गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज में भी. दोनों रिपोर्टें अब CID और जुबिन की पत्नी गरिमा सैकिया गर्ग के पास हैं. CID की ASP मोरामी दास व्यक्तिगत रूप से रिपोर्टें लेकर उनके घर पहुंचीं. गरिमा ने रिपोर्ट पुलिस को लौटा दीं, कहते हुए कि सार्वजनिक करने का फैसला CID ही करे. सवाल यह उठ खड़ा हुआ कि रिपोर्ट में ऐसा क्या है जिसे छिपाया जा रहा है?
क्या हुआ था यॉट पर? वो 19 सितंबर 2025 का दिन था. जुबिन अपने मैनेजर और कुछ जानकारों के साथ सिंगापुर में थे. जुबिन के बैंडमेट शेखर ज्योति गोस्वामी ने दावा किया कि जुबिन की मौत डूबने से नहीं बल्कि जहर देने से हुई. उनके अनुसार, यॉट के सागर में पहुंचते ही मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा ने पूरी कमान अपने हाथ में ले ली थी. ड्रिंक्स सर्व करने वाले तन्मय फुकन को भी रोक दिया गया, और उसने सभी को खुद ड्रिंक्स परोसी थी. शेखर का आरोप है कि जुबिन को पहले ही जहर दिया गया था.
'जाबो दे, जाबो दे' का क्या था मतलब? शेखर का दावा है कि पानी में उतरते ही जुबिन की तबीयत बिगड़ गई. वह ट्यूब पकड़ने की कोशिश करते दिखे लेकिन पहुंच नहीं सके. जब लोग उन्हें बचाने दौड़े तो मैनेजर सिद्धार्थ ने चिल्लाकर कहा- 'जाबो दे, जाबो दे,' यानी उसे जाने दो. शेखर ने इस बात को हत्या की मंशा से जोड़ा है. लेकिन यहीं बड़ा विरोधाभास है. शेखर खुद भी इस केस में आरोपी के रूप में गिरफ्तार किए जा चुके हैं.
शेखर पर ही क्यों उठे सवाल? जुबिन की पत्नी गरिमा गर्ग ने शेखर के बयान पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने पूछा कि अगर शेखर को सच में जहर देने की जानकारी थी, तो वह 15 दिनों तक खामोश क्यों रहे? उन्होंने यह बात पोस्टमार्टम से पहले या घटना के तुरंत बाद क्यों नहीं बताई? CID भी शेखर की चुप्पी को संदेह से देख रही है, और इसी वजह से वह गिरफ्तारी के दायरे में आए.

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