
जब चांद की सतह पर इस शख़्स ने चलाई थी कार! धरती से 3.84 लाख किमी दूर ऐसे दौड़ा था 'Moon Buggy'
AajTak
एक बार खगोलशास्त्री फ्रेड हॉयल ने कहा था कि, यदि आप 95 किमी/घंटा (60 मील प्रति घंटे) की गति से कार चला सकते हैं, तो अंतरिक्ष में जाने में केवल एक घंटा लगेगा और चांद तक पहुंचने में 6 महीने लगेंगे.
Chandrayaan-3 तीव्र गति से चांद के आर्बिट में दौड़ रहा है, हर पल ये यान भारत की उम्मीदों के साथ चांद के और करीब पहुंच रहा है. ऐसे में मून (Moon) से आने वाली तमाम जानकारियों को लेकर लोगों के बीच कौतुहल बना हुआ है. चांद पर जल... जीवन... संबंधित तमाम सवाल लोगों के जेहन में हमेशा से आते रहे हैं और इनको लेकर तलाश आज भी जारी है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यदि आपको चांद पर कार चलाने का मौका मिले तो ये एक्सपीरिएंस कैसा होगा? यदि अब तक आपने इसके बारे में नहीं सोचा है तो एक बार सोचिए...!
आज हम आपको एक ऐसे शख्स और उस घटना के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसने न केवल धरती से तकरीबन 3.84 लाख किलोमीटर दूर चांद तक की यात्रा की बल्कि चंद्रमा की सतह पर कार भी दौड़ाई. हम बात कर रहे हैं, 'डेविड रैंडोल्फ स्कॉट' (David Randolph Scott) की, जिन्होनें अपने जीवन के 546 घंटे और 54 मिनट अंतरिक्ष में बिताएं है और साल 1971 में अपोलो-15 मिशन के दौरान चांद की सतह पर गाड़ी चलाने वाले पहले व्यक्ति बने. ये कोई आम कार नहीं थी, बल्कि ये एक मून रोवर व्हीकल था जिसे चांद पर की जा रही खोज में मदद के लिए तैयार किया गया था.
अपोलो-15 मिशन के कमांडर डेविड स्कॉट. Pic: NASAकौन है डेविड रैंडोल्फ स्कॉट:
ये बात है 31 जुलाई 1971 की जब स्कॉट ने चांद पर किसी वाहन को चलाया था और वो ऐसा करने वाले दुनिया के पहले इंसान थें. 6 जून 1932 को अमेरिकी इंजीनियर, टेस्ट पायलट और नासा के अंतरिक्ष यात्री डेविड रैंडोल्फ स्कॉट का जन्म हुआ था. स्कॉट अपोलो 15 मिशन के कमांडर के रूप में चंद्रमा पर चलने वाले सातवें व्यक्ति बने, जो चौथी मानव मून लैंडिंग थी.
स्कॉट ग्रुप-3 अंतरिक्ष यात्रियों में से पहले थे, यानी 1963 में नासा द्वारा चुने गए अंतरिक्ष यात्रियों के तीसरे समूह को उड़ान भरने के लिए चुना गया था और वह अपने इस मिशन की कमान संभालने वाले भी पहले व्यक्ति थें. कमांडर नील आर्मस्ट्रांग के साथ मिलकर, स्कॉट ने जेमिनी 8 (16 मार्च, 1966) की उड़ान का संचालन भी किया था, इसलिए उन्हें मून मिशन का पूरा अनुभव भी था.
स्कॉट ने साल 1969 में कमांडर जेम्स मैकडिविट और मून मॉड्यूल पायलट रसेल श्वेकार्ट के साथ अपोलो-9 के लिए कमांड मॉड्यूल पायलट के रूप में भी कार्य किया, जो पूरी तरह से कॉन्फ़िगर किए गए अपोलो स्पेसक्रॉफ्ट द्वारा पृथ्वी के ऑर्बिटल क्वॉलिफिकेशन और वेरिफिकेशन टेस्ट को पूरा करने वाला पहला अपोलो मिशन था.

दुबई के शाही परिवार से ताल्लुक रखने वाली राजकुमारी 2019 में अपने पति के डर से भाग गई और ब्रिटेन में जाकर शरण ले ली. यह दावा करते हुए कि उसे अपने पति से जान का खतरा है. क्योंकि उसे पता चला था कि शेख ने पहले अपनी ही दो बेटियों का अपहरण कर लिया था और उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध दुबई वापस ले आया था. अब वह ब्रिटेन के एक गांव में अपना शाही आशियाना बना रही हैं.

Chalisa Yog: ज्योतिष शास्त्र में चालीसा योग उस स्थिति को कहा जाता है जब दो ग्रह आपस में 40 अंश (डिग्री) की दूरी पर स्थित होते हैं. इस योग का नाम ही “चालीसा” है, क्योंकि इसका संबंध 40 अंश के अंतर से होता है. चालीसा योग का प्रभाव हर राशि पर समान नहीं होता. यह ग्रहों की स्थिति, भाव और व्यक्ति की कुंडली पर निर्भर करता है कि यह योग शुभ फल देगा या सावधानी की जरूरत पैदा करेगा.

Nikon Z5II review: एक कैमरा खरीदना चाहते हैं और अभी कैमरा यूज में प्रो नहीं हैं, तो आपको कम बजट वाला एक ऑप्शन चुनना चाहिए. ऐसे ही एक कैमरे को हमने पिछले दिनों इस्तेमाल किया है, जो शुरुआती बजट में आता है. इसका इस्तेमाल आप फोटो और वीडियो दोनों ही काम में कर सकते हैं. आइए जानते हैं Nikon Z5II की खास बातें.










