
छत्तीसगढ़: सुरक्षा शिविर का आदिवासी कर रहे विरोध, प्रदर्शन में मारे गए लोगों को पुलिस ने माओवादी बताया
The Wire
छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के सिलगर गांव में बने सीआरपीएफ के शिविर का आदिवासी विरोध कर रहे हैं. 17 मई को पुलिस फायरिंग में मारे गए तीन लोगों को पुलिस ने माओवादी बताया है, जबकि उनके परिजन इस बात से इनकार कर रहे हैं.
सिलगर: छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के सिलगर गांव स्थित सीआरपीएफ के सुरक्षा शिविर के विरोध में आदिवासियों द्वारा प्रदर्शन किया जा रहा है. इन प्रदर्शनों के दौरान पुलिस फायरिंग में बीते 17 मई को तीन लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग घायल हुए थे. The violent history of Bastar saw a new chapter today when, perhaps the first instance in a decade, police opened fire at unarmed adivasis in Silger, killing 3 and injuring at least 16. पुलिस ने मारे गए लोगों को माओवादी बताया है, जबकि आदिवासियों ने इस बात से इनकार किया है. It wasn't a fake encounter, or a gunfire at night. सिलगर सुरक्षा शिविर के विरोध में तीन लोगों के मारे जाने के दो दिन बाद 19 मई को शिविर के विरोध में आदिवासी समुदायों के एक हजार से अधिक लोग शिविर के पास एकत्र हुए और 17 मई को गिरफ्तार किए गए छह लोगों की रिहाई की मांग की. Bullets flew under the thick sun. pic.twitter.com/pMXUWkM6FY इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 32 वर्षीय आयते कोर्सा ने कहा, ‘हम तब तक विरोध करते रहेंगे, जब तक वे शिविर को हटा नहीं देते. अब हम अपने भाइयों के लिए भी विरोध कर रहे हैं, जिन्हें गलत तरीके से गिरफ्तार किया गया है.’ — Ashutosh Bhardwaj (@ashubh) May 17, 2021
यह त्रासदी नवंबर 2014 में बिलासपुर ज़िले के नेमिचंद जैन अस्पताल (सकरी), गौरेला, पेंड्रा और मरवाही में आयोजित सरकारी सामूहिक नसबंदी शिविरों के दौरान हुई थी. ज़िला अदालत ने आरोपी सर्जन को ग़ैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया और दो साल की क़ैद, 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया. साथ ही पांच अन्य आरोपियों को बरी कर दिया.

वी-डेम की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के अंत तक दुनिया में 92 तानाशाही वाले देश और 87 लोकतांत्रिक देश मौजूद थे. भारत अभी भी 'चुनावी तानाशाह' बना हुआ है, इस श्रेणी में वह 2017 में शामिल हुआ था. 179 देशों में सें भारत लिबरल डेमोक्रेसी इंडेक्स में 105वें स्थान पर है. पिछले वर्ष यह 100वें स्थान पर था.

बीते 3 फरवरी को बजट सत्र के पहले चरण के दौरान लोकसभा द्वारा पारित एक प्रस्ताव के बाद अनुशासनहीन व्यवहार के लिए सात कांग्रेस सांसदों और एक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद को निलंबित कर दिया गया था. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें इन सदस्यों का निलंबन वापस लेने पर सहमति बनी.

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बीते 3 फरवरी को बजट सत्र के पहले चरण के दौरान लोकसभा द्वारा पारित एक प्रस्ताव के बाद अनुशासनहीन व्यवहार के लिए सात कांग्रेस सांसदों और एक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद को निलंबित कर दिया गया था. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें इन सदस्यों का निलंबन वापस लेने पर सहमति बनी.

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