
'चूरन नहीं प्रसाद...', सीएम योगी के बयान पर शिवपाल-अखिलेश का पलटवार
AajTak
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि वसूली को चंदा कहने वाले अब प्रसाद को चूरन कह रहे हैं. कभी ये छियालिस में छप्पन वाली उल्टी गणित समझाते हैं, इनका सब कुछ उल्टा-पुल्टा है, इसीलिए इस बार जनता इनको उलटने-पलटने जा रही है.
सपा नेता शिवपाल यादव और अखिलेश यादव ने सीएम योगी के एक बयान पर निशाना साधा है. शिवपाल ने सीएम के एक वीडियो को रीपोस्ट करते हुए लिखा कि मुख्यमंत्री महोदय, भगवान सत्यनारायण की कथा के पश्चात चूरन नहीं, प्रसाद वितरित होता है. पवित्र प्रसाद को चूरन कहना करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का अपमान है.
बता दें कि शिवपाल यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सीएम योगी का एक वीडियो शेयर किया है. इसमें मुख्यमंत्री को यह कहते सुना जा सकता है कि 'मुझे तरस तो बेचारे शिवपाल पर आता है, वो तो केवल जैसे सत्यनारायण की कथा में एक यजमान होता है और कथा सुनता है, लेकिन बाद में अन्य लोगों को चूरन वितरण कर दिया है. तो ये (शिवपाल) केवल चूरन खाने वाले व्यक्ति बनकर रह गए हैं.'
इस बयान पर पलटवार करते हुए शिवपाल यादव ने कहा कि 'ज्ञानी मुख्यमंत्री महोदय, भगवान सत्यनारायण की कथा के बाद चूरन नहीं, बल्कि प्रसाद वितरित होता है. पवित्र प्रसाद को चूरन कहना करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का अपमान है. जहां तक चूरन खाने वाले व्यक्ति का सवाल है, तो आपको पता होना चाहिए कि इस चूरन खाने वाले ने बहुतों का हाजमा दुरुस्त किया है.
वहीं, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि वसूली को चंदा कहने वाले अब प्रसाद को चूरन कह रहे हैं. कभी ये छियालिस में छप्पन वाली उल्टी गणित समझाते हैं, इनका सब कुछ उल्टा-पुल्टा है, इसीलिए इस बार जनता इनको उलटने-पलटने जा रही है.
अखिलेश ने कहा कि जनता सही पाठ पढ़ाने के लिए भाजपा की क्लास लेने को तैयार है, पहले चरण का लेक्चर हो चुका है, दूसरा सबक़ कल दिया जाएगा. आखिरी चरण आते-आते जनता इनका पूरा इलाज कर देगी.

उत्तर प्रदेश की सियासत में उल्टी गंगा बहने लगी है. मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान को लेकर हुआ विवाद अब बड़ा मुद्दा बन गया है. जहां खुद अविमुक्तेश्वरानंद के तेवर सरकार पर तल्ख हैं, तो वहीं बीजेपी पर शंकराचार्य के अपमान को लेकर समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज में संगम नोज तक पालकी पर जाकर स्नान करने से उन्हें रोका था.

झारखंड के लातेहार जिले के भैंसादोन गांव में ग्रामीणों ने एलएलसी कंपनी के अधिकारियों और कर्मियों को बंधक बना लिया. ग्रामीणों का आरोप था कि कंपनी बिना ग्राम सभा की अनुमति गांव में आकर लोगों को ठगने और जमीन हड़पने की कोशिश कर रही थी. पुलिस के हस्तक्षेप के बाद लगभग दो घंटे में अधिकारी सुरक्षित गांव से बाहर निकल सके.

दिल्ली के सदर बाजार में गोरखीमल धनपत राय की दुकान की रस्सी आज़ादी के बाद से ध्वजारोहण में निरंतर उपयोग की जाती है. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के बाद यह रस्सी नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाने लगी. इस रस्सी को सेना पूरी सम्मान के साथ लेने आती है, जो इसकी ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्ता को दर्शाता है. सदर बाजार की यह रस्सी भारत के स्वाधीनता संग्राम और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनी हुई है. देखिए रिपोर्ट.

संभल में दंगा मामले के बाद सीजेएम के तबादले को लेकर विवाद शुरू हो गया है. पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए गए थे लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की. इस पर सीजेएम का अचानक तबादला हुआ और वकील प्रदर्शन कर रहे हैं. समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और AIMIM ने न्यायपालिका पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है. इस विवाद में राजनीतिक सियासत भी जुड़ी है. हाई कोर्ट के आदेशानुसार जजों के ट्रांसफर होते हैं लेकिन इस बार बहस हुई कि क्या यहां राज्य सरकार ने हस्तक्षेप किया.









