
चुनाव से पहले CM बदलने का दांव कितना सफल होता है? BJP कई बार कर चुकी ऐसा
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दिल्ली चुनाव में आम आदमी पार्टी नए मुख्यमंत्री के साथ चुनाव मैदान में जाएगी, केजरीवाल के इस्तीफे के ऐलान के साथ ही यह तय हो गया है. बीजेपी ऐसा कई बार कर चुकी है. जानिए जहां चुनाव से पहले बीजेपी ने सीएम बदले, वहां चुनाव नतीजे कैसे रहे?
केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दो दिन में इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है. केजरीवाल ने कहा है कि आम आदमी पार्टी के विधायक नया मुख्यमंत्री चुनेंगे. दिल्ली में सियासी हलचल के बीच यह तय हो गया है कि आम आदमी पार्टी नए मुख्यमंत्री के साथ चुनाव मैदान में जाएगी. ये पहला मौका नहीं है जब किसी प्रदेश या केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री बदला गया हो. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) तो एंटी इनकम्बेंसी की काट के लिए सीएम बदलने, सीएम फेस घोषित किए बगैर चुनाव मैदान में उतरने का दांव आजमाती रही है. चुनाव से पहले सीएम बदलने का दांव कितना सफल होता है?
दिल्ली
चुनाव से ठीक पहले सीएम बदलने का दांव बीजेपी ने 1998 के दिल्ली चुनाव से ठीक पहले चला था. पार्टी ने तब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा को हटाकर उनकी जगह सुषमा स्वराज को सीएम बनाया था. दिल्ली की पांचवी और पहली महिला मुख्यमंत्री सुषमा तब 53 दिन तक सीएम पद पर रहीं. बीजेपी सुषमा स्वराज की अगुवाई में ही चुनाव मैदान में उतरी और तब पार्टी हार गई थी. 1993 के चुनाव में 70 सदस्यों वाली दिल्ली विधानसभा की 49 सीटें जीतने वाली बीजेपी 15 सीटें ही जीत सकी थी.
गुजरात
गुजरात के 2022 चुनाव से पहले 2021 में ही बीजेपी ने सूबे की सत्ता का चेहरा बदल दिया था. 2017 के चुनाव में बीजेपी की जीत के बाद विजय रुपाणी को मुख्यमंत्री बनाया गया था. सरकार का कार्यकाल 2022 में पूरा होना था और इसी साल चुनाव होने थे लेकिन पार्टी ने 2021 में ही सीएम बदल दिया. बीजेपी ने गुजरात सरकार की कमान भूपेंद्र पटेल को सौंप दी. पार्टी का यह प्रयोग सफल भी रहा. बीजेपी विधानसभा चुनाव में डेढ़ सौ से अधिक सीटें जीत प्रचंड विजय के साथ सूबे की सत्ता में वापसी कर ली थी.
उत्तराखंड

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