
चुनाव में 'जमानत जब्त' होने का मतलब क्या होता है, जानिए कितने वोट आने पर बचती है जमानत
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देश में पंचायत चुनाव से लेकर राष्ट्रपति के चुनाव तक, हर चुनाव लड़ने पर उम्मीदवार को एक रकम जमा करानी होती है जिसे जमानत राशि कहा जाता है. तय वोट से कम वोट हासिल करने वाले उम्मीदवार की जमानत राशि जब्त कर ली जाती है.
'इनकी तो जमानत जब्त हो गई...', 'ये तो अपनी जमानत भी नहीं बचा पाए...', 10 मार्च को जब पांचों राज्यों के विधानसभा चुनाव के वोटों के रिजल्ट आएंगे तो आपको ऐसे शब्द सुनाई देने लगेंगे. लेकिन क्या आपको बता है कि जमानत जब्त होना क्या होता है.
दरअसल, हर चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार को एक तय रकम चुनाव आयोग में जमा करानी होती है, इसे ही जमानत राशि कहा जाता है. अगर कोई उम्मीदवार तय वोट हासिल नहीं कर पाता तो उसकी जमानत राशि जब्त हो जाती है.
ये जमानत राशि हर चुनाव की अलग-अलग होती है. पंचायत चुनाव से लेकर राष्ट्रपति के चुनाव तक, हर चुनाव में लड़ने वाले उम्मीदवार को जमानत राशि देनी होती है.
कितनी होती है जमानत राशि?
- ये बात तो पहले ही बता चुके हैं कि हर चुनाव के लिए अलग-अलग जमानत राशि होती है. लोकसभा और विधानसभा चुनाव की जमानत राशि का जिक्र रिप्रेंजेंटेटिव्स ऑफ पीपुल्स एक्ट, 1951 में जबकि राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव की जमानत राशि का जिक्र प्रेसिडेंट एंड वाइस प्रेसिडेंट इलेक्शन एक्ट, 1952 में किया गया है.
- लोकसभा और विधानसभा चुनाव में सामान्य वर्ग और एससी-एसटी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए अलग-अलग जमानत राशि होती है. जबकि, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव में सभी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए एक ही राशि होती है.

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