
चीन की महिला राजदूत का नेपाल में गेम ओवर! नहीं चल पाया एंटी इंडिया एजेंडा
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काठमांडू में 4 साल के कार्यकाल में हाओ यांगकी ने एंटी इंडिया एजेंडे को बढ़ावा देने के लिए बीजिंग के सॉफ्ट पावर और अपनी स्टार छवि का भरपूर इस्तेमाल किया. माना जाता है कि नेपाल की ओर से नक्शा विवाद को पैदा करने के पीछे हाओ यांगकी का ही हाथ था.
नेपाल में अड्डा जमाकर भारत के खिलाफ गतिविधियों को बढ़ावा देने वाली चीनी राजदूत हाओ यांगकी (Hou Yanqi) का काठमांडू में गेम ओवर हो गया है. लंबे समय के बाद हाओ यांगकी को आखिरकार नेपाल से जाना पड़ा है. नेपाल में बदले राजनीतिक समीकरण, हाल में हुए चुनाव में नेशनल कांग्रेस की वापसी की संभावनाओं के बीच ये भारत के लिहाज से बेहतर खबर है.
सोशल मीडिया स्टार और नेपाल में चीन की राजदूत रहीं हाओ यांगकी वो डिप्लोमैट थीं जिनकी कभी नेपाल पीएम हाउस और राष्ट्रपति भवन में बेरोक टोक पहुंचती थीं. वह काठमांडू में कैसे भारत विरोध को भड़का रही थीं इसे जानने के लिए दो साल पहले का एक राजनीतिक घटनाक्रम समझना जरूरी है.
तब नेपाल अचानक भारत को आंख दिखाने लगा
साल 2020 की बात है. नेपाल के प्रधानमंत्री थे के पी शर्मा ओली. जून 2020 में नेपाल की संसद एक ऐसा प्रस्ताव पास करती है जिससे भारत की भौहें तन जाती है. नेपाल ने अपने देश का एक नया नक्शा संसद से पास करवाया, इस नक्शे में नेपाल तीन वैसी जगहों को अपना इलाका बता रहा था जो भारत की जद में हैं. ये इलाके है उत्तराखंड में मौजूद लिपुलेख लिम्पियाधुरा कालापानी.
नेपाल के तत्कालीन प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली मीडिया में बयान देते हुए नजर आए. उन्होंने कहा कि इन तीनों जगहों को नेपाल अपने क्षेत्र में शामिल करेगा. भारत अपने सालों पुराने पड़ोसी के रवैये में अचानक आए बदलाव से हैरान था. आखिर सालों से जिस देश से भारत का घर आंगन जैसा रिश्ता रहा वो नेपाल अचानक भारत को आंख क्यों दिखा रहा था?
अभी हुए चुनाव में सम्मानजनक हैसियत हासिल करने के लिए जूझ रहे ओली ने तब कहा था कि अब हम कूटनीति के माध्यम से इन क्षेत्रों को प्राप्त करने का प्रयास करेंगे, यदि कोई इससे नाराज हो तो हम इसके बारे में चिंतित नहीं हैं. हम किसी भी कीमत पर उसकी जमीन पर अपना दावा पेश करेंगे.'

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